పరిశుద్ధ గ్రంథము
पुराना नियम
न्यायियों
अध्याय 20
- Verse 1: तब दान से लेकर बेर्शेबा तक के सब इस्राएली और गिलाद के लोग भी निकले, और उनकी मण्डली एक मत होकर मिस्पा में यहोवा के पास इकट्ठी हुई।
- Verse 2: और सारी प्रजा के प्रधान लोग, वरन् सब इस्राएली गोत्रों के लोग जो चार लाख तलवार चलानेवाले प्यादे थे, परमेश्वर की प्रजा की सभा में उपस्थित हुए।
- Verse 3: (बिन्यामीनियों ने सुना कि इस्राएली मिस्पा को आए हैं।) और इस्राएली पूछने लगे, “हम से कहो, यह बुराई कैसे हुई?”
- Verse 4: उस मार डाली हुई स्त्री के लेवीय पति ने उत्तर दिया, “मैं अपनी रखैल समेत बिन्यामीन के गिबा में टिकने को गया था।
- Verse 5: तब गिबा के पुरुषों ने मुझ पर चढ़ाई की, और रात के समय घर को घेर के मुझे घात करना चाहा; और मेरी रखैल से इतना कुकर्म किया कि वह मर गई।
- Verse 6: तब मैं ने अपनी रखैल को लेकर टुकड़े टुकड़े किया, और इस्राएलियों के भाग के सारे देश में भेज दिया, उन्होंने तो इस्राएल में महापाप और मूढ़ता का काम किया है।
- Verse 7: सुनो, हे इस्राएलियो, सब के सब देखो, और यहीं अपनी सम्मति दो।”
- Verse 8: तब सब लोग एक मन हो, उठकर कहने लगे, “न तो हम में से कोई अपने डेरे जाएगा, और न कोई अपने घर की ओर मुड़ेगा।
- Verse 9: परन्तु अब हम गिबा से यह करेंगे, अर्थात् हम चिट्ठी डाल डालकर उस पर चढ़ाई करेंगे,
- Verse 10: और हम सब इस्राएली गोत्रों में सौ पुरुषों में से दस, और हज़ार पुरुषों में से एक सौ, और दस हज़ार में से एक हज़ार पुरुषों को ठहराएँ, कि वे सेना के लिये भोजनवस्तु पहुँचाएँ; इसलिये कि हम बिन्यामीन के गिबा में पहुँचकर उसको उस मूढ़ता का पूरा फल भुगता सकें जो उन्होंने इस्राएल में की है।”
- Verse 11: तब सब इस्राएली पुरुष उस नगर के विरुद्ध एक पुरुष के समान संगठित होकर इकट्ठे हो गए।
- Verse 12: तब इस्राएली गोत्रियों ने बिन्यामीन के सारे गोत्रियों में कितने मनुष्य यह पूछने को भेजे, “यह क्या बुराई है जो तुम लोगों में की गई है?
- Verse 13: अब उन गिबावासी लुच्चों को हमारे हाथ कर दो, कि हम उनको जान से मार के इस्राएल में से बुराई का नाश करें।” परन्तु बिन्यामीनियों ने अपने भाई इस्राएलियों की मानने से इन्कार किया।
- Verse 14: और बिन्यामीनी अपने अपने नगर में से आकर गिबा में इसलिये इकट्ठा हुए, कि इस्राएलियों से लड़ने को निकलें।
- Verse 15: और उसी दिन गिबावासी पुरुषों को छोड़, जिनकी गिनती सात सौ चुने हुए पुरुष ठहरी, अन्य नगरों से आए हुए तलवार चलानेवाले बिन्यामीनियों की गिनती छब्बीस हज़ार पुरुष ठहरी।
- Verse 16: इन सब लोगों में से सात सौ बैंहत्थे चुने हुए पुरुष थे, जो सब के सब ऐसे थे कि गोफन से पत्थर मारने में बाल भर भी न चूकते थे।
- Verse 17: और बिन्यामीनियों को छोड़ इस्राएली पुरुष चार लाख तलवार चलानेवाले थे; ये सब के सब योद्धा थे।
- Verse 18: सब इस्राएली उठकर बेतेल को गए, और यह कहकर परमेश्वर से सलाह ली, और इस्राएलियों ने पूछा, “हम में से कौन बिन्यामीनियों से लड़ने को पहले चढ़ाई करे?” यहोवा ने कहा, “यहूदा पहले चढ़ाई करे।”
- Verse 19: तब इस्राएलियों ने सबेरे उठकर गिबा के सामने डेरे डाले।
- Verse 20: और इस्राएली पुरुष बिन्यामीनियों से लड़ने को निकल गए; और इस्राएली पुरुषों ने उससे लड़ने को गिबा के विरुद्ध पाँति बाँधी।
- Verse 21: तब बिन्यामीनियों ने गिबा से निकल उसी दिन बाईस हज़ार इस्राएली पुरुषों को मारके मिट्टी में मिला दिया।
- Verse 22: तौभी इस्राएली पुरुषों ने साहस कर के उसी स्थान में जहाँ उन्होंने पहले दिन पाँति बाँधी थी, फिर पाँति बाँधी।
- Verse 23: और इस्राएली जाकर साँझ तक यहोवा के सामने रोते रहे; और यह कहकर यहोवा से पूछा, “क्या हम अपने भाई बिन्यामीनियों से लड़ने को फिर पास जाएँ?” यहोवा ने कहा, “हाँ, उन पर चढ़ाई करो।”
- Verse 24: तब दूसरे दिन इस्राएली बिन्यामीनियों के निकट पहुँचे।
- Verse 25: तब बिन्यामीनियों ने दूसरे दिन उनका सामना करने को गिबा से निकलकर फिर अठारह हज़ार इस्राएली पुरुषों को मारके, जो सब के सब तलवार चलानेवाले थे, मिट्टी में मिला दिया।
- Verse 26: तब सब इस्राएली, वरन् सब लोग बेतेल को गए; और रोते हुए यहोवा के सामने बैठे रहे, और उस दिन साँझ तक उपवास किया, और यहोवा को होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।
- Verse 27: और इस्राएलियों ने यहोवा से सलाह ली (उस समय परमेश्वर का वाचा का सन्दूक वहीं था,
- Verse 28: और पीनहास, जो हारून का पोता और एलीआज़ार का पुत्र था, उन दिनों में उसके सामने हाजिर रहा करता था), उन्होंने पूछा, “क्या हम एक और बार अपने भाई बिन्यामीनियों से लड़ने को निकलें, या उनको छोड़ दें?” यहोवा ने कहा, “चढ़ाई कर; क्योंकि कल मैं उनको तेरे हाथ में कर दूँगा।”
- Verse 29: तब इस्राएलियों ने गिबा के चारों ओर लोगों को घात में बैठाया।
- Verse 30: तीसरे दिन इस्राएलियों ने बिन्यामीनियों पर फिर चढ़ाई की, और पहले के समान गिबा के विरुद्ध पाँति बाँधी।
- Verse 31: तब बिन्यामीनी उन लोगों का सामना करने को निकले, और नगर के पास से खींचे गए; और जो दो सड़क, एक बेतेल को और दूसरी गिबा को गई है, उनमें लोगों को पहले के समान मारने लगे, और मैदान में कोई तीस इस्राएली मारे गए।
- Verse 32: बिन्यामीनी कहने लगे, “वे पहले के समान हम से मारे जाते हैं।” परन्तु इस्राएलियों ने कहा, “हम भागकर उनको नगर में से सड़कों में खींच ले आएँ।”
- Verse 33: तब सब इस्राएली पुरुषों ने अपने स्थान से उठकर बालतामार में पाँति बाँधी और घात में बैठे हुए इस्राएली अपने स्थान से, अर्थात् मारेगेवा से अचानक निकले।
- Verse 34: तब सब इस्राएलियों में से छाँटे हुए दस हज़ार पुरुष गिबा के सामने आए, और घोर लड़ाई होने लगी; परन्तु वे न जानते थे कि हम पर विपत्ति अभी पड़ना चाहती है।
- Verse 35: तब यहोवा ने बिन्यामीनियों को इस्राएल से हरवा दिया, और उस दिन इस्राएलियों ने पच्चीस हज़ार एक सौ बिन्यामीनी पुरुषों को नष्ट किया, जो सब के सब तलवार चलानेवाले थे।
- Verse 36: तब बिन्यामीनियों ने देखा कि हम हार गए। और इस्राएली पुरुष उन घातकों का भरोसा करके जिन्हें उन्होंने गिबा के पास बैठाया था, बिन्यामीनियों के सामने से चले गए।
- Verse 37: परन्तु घातक लोग फुर्ती करके गिबा पर झपट गए; और घातकों ने आगे बढ़कर सारे नगर को तलवार से मारा।
- Verse 38: इस्राएली पुरुषों और घातकों के बीच यह चिह्न ठहराया गया था, कि वे नगर में से बहुत बड़ा धूएँ का खम्भा उठाएँ।
- Verse 39: इस्राएली पुरुष तो लड़ाई में हटने लगे, और बिन्यामीनियों ने यह कहकर कि निश्चय वे पहली लड़ाई के समान हम से हारे जाते हैं, इस्राएलियों को मार डालने लगे, और तीस एक पुरुषों को घात किया।
- Verse 40: परन्तु जब वह धूएँ का खम्भा नगर में से उठने लगा, तब बिन्यामीनियों ने अपने पीछे जो दृष्टि की तो क्या देखा कि नगर का नगर धूआँ होकर आकाश की ओर उड़ रहा है।
- Verse 41: तब इस्राएली पुरुष घूमे, और बिन्यामीनी पुरुष यह देखकर घबरा गए कि हम पर विपत्ति आ पड़ी है।
- Verse 42: इसलिये उन्होंने इस्राएली पुरुषों को पीठ दिखाकर जंगल का मार्ग लिया; परन्तु लड़ाई उनसे होती ही रही, और जो अन्य नगरों में से आए थे उनको इस्राएली रास्ते में नष्ट करते गए।
- Verse 43: उन्होंने बिन्यामीनियों को घेर लिया, और उन्हें खदेड़ा, वे मनुहा में वरन् गिबा के पूर्व की ओर तक उन्हें लताड़ते गए।
- Verse 44: और बिन्यामीनियों में से अठारह हज़ार पुरुष जो सब के सब शूरवीर थे मारे गए।
- Verse 45: तब वे घूमकर जंगल में की रिम्मोन नामक चट्टान की ओर भाग गए; परन्तु इस्राएलियों ने उनमें से पाँच हज़ार को चुन–चुनकर सड़कों में मार डाला; फिर गिदोम तक उनके पीछे पड़के उनमें से दो हज़ार पुरुष मार डाले।
- Verse 46: तब बिन्यामीनियों में से जो उस दिन मारे गए वे पच्चीस हज़ार तलवार चलानेवाले पुरुष थे, और ये सब शूरवीर थे।
- Verse 47: परन्तु छ: सौ पुरुष घूमकर जंगल की ओर भागे, और रिम्मोन नामक चट्टान में पहुँच गए, और चार महीने वहीं रहे।
- Verse 48: तब इस्राएली पुरुष, लौटकर बिन्यामीनियों पर लपके और नगरों में क्या मनुष्य, क्या पशु जो कुछ मिला, सब को तलवार से नष्ट कर डाला। और जितने नगर उन्हें मिले उन सभों को आग लगाकर फूँक दिया।