ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
2 इतिहास
अध्याय 17
- Verse 1: उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राज्य करने लगा, और उसने इस्राएल के विरुद्ध अपना बल बढ़ाया।
- Verse 2: उसने यहूदा के सब गढ़वाले नगरों में सिपाहियों के दल ठहरा दिए, और यहूदा के देश में और एप्रैम के उन नगरों में भी जो उसके पिता आसा ने ले लिये थे, सिपाहियों की चौकियाँ बैठा दीं।
- Verse 3: यहोवा यहोशापात के संग रहा, क्योंकि उसने अपने मूलपुरुष दाऊद की प्राचीन चाल का अनुसरण किया और बाल देवताओं की खोज में न लगा,
- Verse 4: वरन् वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था, और इस्राएल के से काम नहीं करता था।
- Verse 5: इस कारण यहोवा ने राज्य को उसके हाथ में दृढ़ किया, और सारे यहूदी उसके पास भेंट लाया करते थे, और उसके पास बहुत धन हो गया और उसका वैभव बढ़ गया।
- Verse 6: यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया; फिर उसने यहूदा से ऊँचे स्थान और अशेरा नामक मूरतें दूर कर दीं।
- Verse 7: उसने अपने राज्य के तीसरे वर्ष में बेन्हैल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह नामक अपने हाकिमों को यहूदा के नगरों में शिक्षा देने को भेज दिया।
- Verse 8: उनके साथ शमायाह, नतन्याह, जबद्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह और तोबदोनिय्याह नामक लेवीय और उनके संग एलीशामा और यहोराम नामक याजक थे।
- Verse 9: अत: उन्होंने यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक अपने साथ लिये हुए यहूदा में शिक्षा दी, वरन् वे यहूदा के सब नगरों में प्रजा को सिखाते हुए घूमे।
- Verse 10: यहूदा के आस पास के देशों के राज्य राज्य में यहोवा का ऐसा डर समा गया कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।
- Verse 11: कुछ पलिश्ती यहोशापात के पास भेंट और कर समझकर चाँदी लाए; और अरब के लोग भी सात हज़ार सात सौ मेढ़े और सात हज़ार सात सौ बकरे ले आए।
- Verse 12: यहोशापात बहुत ही बढ़ता गया और उसने यहूदा में किले और भण्डार के नगर तैयार किए,
- Verse 13: और यहूदा के नगरों में उसका बहुत काम होता था, और यरूशलेम में उसके योद्धा अर्थात् शूरवीर रहते थे।
- Verse 14: इनके पितरों के घरानों के अनुसार इनकी यह गिनती थी, अर्थात् यहूदी सहस्रपति तो ये थे, प्रधान अदना, जिसके साथ तीन लाख शूरवीर थे,
- Verse 15: और उसके बाद प्रधान यहोहानान, जिसके साथ दो लाख अस्सी हज़ार पुरुष थे,
- Verse 16: और इसके बाद जिक्री का पुत्र अमस्याह, जिसने अपने को अपनी ही इच्छा से यहोवा को अर्पण किया था, उसके साथ दो लाख शूरवीर थे,
- Verse 17: फिर बिन्यामीन में से एल्यादा नामक एक शूरवीर, जिसके साथ ढाल रखनेवाले दो लाख धनुर्धारी थे,
- Verse 18: और उसके नीचे यहोजाबाद, जिसके साथ युद्ध के हथियार बाँधे हुए एक लाख अस्सी हज़ार पुरुष थे।
- Verse 19: ये वे हैं जो राजा की सेवा में लवलीन थे। ये उनसे अलग थे जिन्हें राजा ने सारे यहूदा के गढ़वाले नगरों में ठहरा दिया।