पवित्र बाइबिल
नया नियम
मरकुस
अध्याय 2
- Verse 1: कई दिन के बाद वह फिर कफरनहूम में आया, और सुना गया कि वह घर में है।
- Verse 2: फिर इतने लोग इकट्ठा हुए कि द्वार के पास भी जगह नहीं थी; और वह उन्हें वचन सुना रहा था।
- Verse 3: और लोग एक लकवे के रोगी को चार मनुष्यों से उठवाकर उसके पास ले आए।
- Verse 4: परन्तु जब वे भीड़ के कारण उसके निकट न पहुँच सके, तो उन्होंने उस छत को जिसके नीचे वह था, खोल दिया; और जब वे उसे उधेड़ चुके, तो उस खाट को जिस पर लकवे का रोगी पड़ा था, लटका दिया।
- Verse 5: यीशु ने उनका विश्वास देखकर उस लकवे के रोगी से कहा, “हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”
- Verse 6: तब कई शास्त्री जो वहाँ बैठे थे, अपने–अपने मन में विचार करने लगे,
- Verse 7: “यह मनुष्य क्यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है! परमेश्वर को छोड़ और कौन पाप क्षमा कर सकता है?”
- Verse 8: यीशु ने तुरन्त अपनी आत्मा में जान लिया कि वे अपने–अपने मन में ऐसा विचार कर रहे हैं, और उनसे कहा, “तुम अपने–अपने मन में यह विचार क्यों कर रहे हो?
- Verse 9: सहज क्या है? क्या लकवे के रोगी से यह कहना कि तेरे पाप क्षमा हुए, या यह कहना कि उठ अपनी खाट उठा कर चल फिर?
- Verse 10: परन्तु जिस से तुम जान लो कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है।” उसने उस लकवे के रोगी से कहा,
- Verse 11: “मैं तुझ से कहता हूँ, उठ, अपनी खाट उठाकर अपने घर चला जा।”
- Verse 12: वह उठा और तुरन्त खाट उठाकर सब के सामने से निकलकर चला गया; इस पर सब चकित हुए, और परमेश्वर की बड़ाई करके कहने लगे, “हम ने ऐसा कभी नहीं देखा। ”
- Verse 13: वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्हें उपदेश देने लगा।
- Verse 14: जाते हुए उस ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, “मेरे पीछे हो ले।” और वह उठकर उसके पीछे हो लिया।
- Verse 15: जब वह उसके घर में भोजन करने बैठा, तब बहुत से चुंगी लेनेवाले और पापी, यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे।
- Verse 16: शास्त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर कि वह तो पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा, “वह तो चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ खाता पीता है!”
- Verse 17: यीशु ने यह सुनकर उनसे कहा, “भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है : मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ।”
- Verse 18: यूहन्ना के चेले, और फरीसी उपवास करते थे; अत: उन्होंने आकर उससे यह कहा, “यूहन्ना के चेले और फरीसियों के चेले क्यों उपवास रखते हैं, परन्तु तेरे चेले उपवास नहीं रखते?”
- Verse 19: यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दूल्हा बरातियों के साथ रहता है, क्या वे उपवास कर सकते हैं? अत: जब तक दूल्हा उनके साथ है, तब तक वे उपवास नहीं कर सकते।
- Verse 20: परन्तु वे दिन आएँगे जब दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे।
- Verse 21: “कोरे कपड़े का पैवन्द पुराने वस्त्र पर कोई नहीं लगाता; नहीं तो वह पैवन्द उसमें से कुछ खींच लेगा, अर्थात् नया, पुराने से, और वह पहले से अधिक फट जाएगा।
- Verse 22: नये दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं रखता, नहीं तो दाखरस मशकों को फाड़ देगा, और दाखरस और मशकें दोनों नष्ट हो जाएँगी; परन्तु नया दाखरस नई मशकों में भरा जाता है।”
- Verse 23: ऐसा हुआ कि वह सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके चेले चलते हुए बालें तोड़ने लगे।
- Verse 24: तब फरीसियों ने उससे कहा, “देख; ये सब्त के दिन वह काम क्यों करते हैं जो उचित नहीं?”
- Verse 25: उसने उनसे कहा, “क्या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा कि जब दाऊद को आवश्यकता हुई, और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उसने क्या किया था?
- Verse 26: उसने कैसे अबियातार महायाजक के समय, परमेश्वर के भवन में जाकर भेंट की रोटियाँ खाईं, जिसका खाना याजकों को छोड़ और किसी को भी उचित नहीं, और अपने साथियों को भी दीं?”
- Verse 27: तब उसने उनसे कहा, “सब्त का दिन मनुष्य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिये।
- Verse 28: इसलिये मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का भी स्वामी है।”