P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 8
2 : “तू कब तक ऐसी ऐसी बातें करता रहेगा, और तेरे मुँह की बातें कब तक प्रचण्ड वायु सी रहेंगी?
3 : क्या परमेश्वर अन्याय करता है? और क्या सर्वशक्तिमान धर्म को उलटा करता है?
4 : यदि तेरे बच्चों ने उसके विरुद्ध पाप किया है, तो उसने उनको उनके अपराध का फल भुगताया है।
5 : तौभी यदि तू आप परमेश्वर को यत्न से ढूँढ़ता, और सर्वशक्तिमान से गिड़गिड़ाकर विनती करता,
6 : और यदि तू निर्मल और धर्मी रहता, तो निश्चय वह तेरे लिये जागता; और तेरी धार्मिकता का निवास फिर ज्यों का त्यों कर देता।
7 : चाहे तेरा भाग पहले छोटा ही रहा हो, परन्तु अन्त में तेरी बहुत बढ़ती होती।
8 : “पिछली पीढ़ी के लोगों से तो पूछ, और जो कुछ उनके पुरखाओं ने जाँच पड़ताल की है उस पर ध्यान दे;
9 : क्योंकि हम तो कल ही के हैं, और कुछ नहीं जानते; और पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान बीतते जाते हैं।
10 : क्या वे लोग तुझ से शिक्षा की बातें न कहेंगे? क्या वे अपने मन से बात न निकालेंगे?
11 : “क्या कछार की घास पानी बिना बढ़ सकती है? क्या सरकण्डा जल बिना बढ़ता है?
12 : चाहे वह हरी हो, और काटी भी न गई हो, तौभी वह और सब भाँति की घास से पहले ही सूख जाती है।
13 : परमेश्वर के सब बिसरानेवालों की गति ऐसी ही होती है और भक्तिहीन की आशा टूट जाती है।
14 : उसकी आशा का मूल कट जाता है; और जिसका वह भरोसा करता है, वह मकड़ी का जाला ठहरता है।
15 : चाहे वह अपने घर पर भरोसा रखे परन्तु वह न ठहरेगा; वह उसे दृढ़ता से थामेगा परन्तु वह स्थिर न रहेगा।
16 : वह धूप पाकर हरा भरा हो जाता है, और उसकी डालियाँ बगीचे में चारों ओर फैलती हैं।
17 : उसकी जड़ कंकरों के ढेर में लिपटी हुई रहती है, और वह पत्थर के स्थान को देख लेता है।
18 : परन्तु जब वह अपने स्थान पर से नष्ट किया जाए, तब वह स्थान उससे यह कहकर मुँह मोड़ लेगा, ‘मैं ने तुझे कभी देखा ही नहीं।’
19 : देख, उसकी आनन्द भरी चाल यही है; फिर उसी मिट्टी में से दूसरे उगेंगे।
20 : “देख, परमेश्वर न तो खरे मनुष्य को निकम्मा जानकर छोड़ देता है, और न बुराई करनेवालों को संभालता है।
21 : वह तो तुझे हँसमुख करेगा; और तुझ से जयजयकार कराएगा।
22 : तेरे बैरी लज्जा का वस्त्र पहिनेंगे, और दुष्टों का डेरा कहीं रहने न पाएगा।”