வேதாகமம்
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 5
- Verse 1: “पुकार कर देख; क्या कोई है जो तुझे उत्तर देगा? और पवित्रों में से तू किस की ओर फिरेगा?
- Verse 2: क्योंकि मूढ़ तो खेद करते करते नष्ट हो जाता है, और भोला जलते जलते मर मिटता है।
- Verse 3: मैं ने मूढ़ को जड़ पकड़ते देखा है; परन्तु अचानक मैं ने उसके वासस्थान को धिक्कारा।
- Verse 4: उसके बच्चे सुरक्षा से दूर हैं, और वे फाटक में पीसे जाते हैं, और कोई नहीं है जो उन्हें छुड़ाए।
- Verse 5: उसके खेत की उपज भूखे लोग खा लेते हैं, वरन् कटीली बाड़ में से भी निकाल लेते हैं; और प्यासा उनके धन के लिये फन्दा लगाता है।
- Verse 6: क्योंकि विपत्ति धूल से उत्पन्न नहीं होती, और न कष्ट भूमि में से उगता है;
- Verse 7: परन्तु जैसे चिंगारियाँ ऊपर ही ऊपर को उड़ जाती हैं, वैसे ही मनुष्य कष्ट भोगने के लिये उत्पन्न हुआ है।
- Verse 8: “परन्तु मैं तो परमेश्वर ही को खोजता रहूँगा और अपना मुक़द्दमा परमेश्वर पर छोड़ दूँगा;
- Verse 9: वह तो ऐसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते।
- Verse 10: वही पृथ्वी के ऊपर वर्षा करता, और खेतों पर जल बरसाता है।
- Verse 11: इसी रीति वह नम्र लोगों को ऊँचे स्थान पर बिठाता है, और शोक का पहिरावा पहिने हुए लोग ऊँचे पर पहुँचकर बचते हैं।
- Verse 12: वह धूर्त लोगों की कल्पनाएँ व्यर्थ कर देता है, और उनके हाथों से कुछ भी बन नहीं पड़ता।
- Verse 13: वह बुद्धिमानों को उनकी धूर्तता ही में फँसाता है; और कुटिल लोगों की युक्ति दूर की जाती है।
- Verse 14: उन पर दिन को अन्धेरा छा जाता है, और दिन दुपहरी में वे रात के समान टटोलते फिरते हैं।
- Verse 15: परन्तु वह दरिद्रों को उनके वचनरूपी तलवार से और बलवानों के हाथ से बचाता है।
- Verse 16: इसलिये कंगालों को आशा होती है, और कुटिल मनुष्यों का मुँह बन्द हो जाता है।
- Verse 17: “देख, क्या ही धन्य है वह मनुष्य, जिसको परमेश्वर ताड़ना देता है; इसलिये तू सर्वशक्तिमान की ताड़ना को तुच्छ मत जान।
- Verse 18: क्योंकि वही घायल करता, और वही पट्टी भी बाँधता है; वही मारता है, और वही अपने हाथों से चंगा भी करता है।
- Verse 19: वह तुझे छ: विपत्तियों से छुड़ाएगा; वरन् सात से भी तेरी कुछ हानि न होने पाएगी।
- Verse 20: अकाल में वह तुझे मृत्यु से, और युद्ध में तलवार की धार से बचा लेगा।
- Verse 21: तू वचनरूपी कोड़े से बचा रहेगा और जब विनाश आए, तब भी तुझे भय न होगा।
- Verse 22: तू विनाश और अकाल के दिनों में हँसमुख रहेगा, और तुझे बनैले जन्तुओं से डर न लगेगा।
- Verse 23: वरन् मैदान के पत्थर भी तुझ से वाचा बाँधे रहेंगे, और वनपशु तुझ से मेल रखेंगे।
- Verse 24: तुझे निश्चय होगा कि तेरा डेरा कुशल से है, और जब तू अपने निवास में देखे तब कोई वस्तु खोई न होगी।
- Verse 25: तुझे यह भी निश्चय होगा कि मेरे बहुत वंश होंगे, और मेरी सन्तान पृथ्वी की घास के तुल्य बहुत होगी।
- Verse 26: जैसे पूलियों का ढेर समय पर खलिहान में रखा जाता है, वैसे ही तू पूरी आयु का होकर क़ब्र को पहुँचेगा।
- Verse 27: देख, हम ने खोज खोजकर ऐसा ही पाया है; इसे तू सुन, और अपने लाभ के लिये ध्यान में रख।”