पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
व्यवस्थाविवरण
अध्याय 32
- Verse 1: “हे आकाश, कान लगा, कि मैं बोलूँ; और हे पृथ्वी, मेरे मुँह की बातें सुन।
- Verse 2: मेरा उपदेश मेंह के समान बरसेगा, और मेरी बातें ओस के समान टपकेंगी, जैसे कि हरी घास पर झींसी, और पौधों पर झड़ियाँ।
- Verse 3: मैं तो यहोवा नाम का प्रचार करूँगा। तुम अपने परमेश्वर की महिमा को मानो!
- Verse 4: “वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उसमें कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है।
- Verse 5: परन्तु इसी जाति के लोग टेढ़े और तिर्छे हैं; ये बिगड़ गए, ये उसके पुत्र नहीं; यह उनका कलंक है।
- Verse 6: हे मूढ़ और निर्बुद्धि लोगो, क्या तुम यहोवा को यह बदला देते हो? क्या वह तेरा पिता नहीं है, जिसने तुझ को मोल लिया है? उसने तुझ को बनाया और स्थिर भी किया है।
- Verse 7: प्राचीनकाल के दिनों को स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षों को विचारो; अपने बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपने वृद्ध लोगों से प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे।
- Verse 8: जब परमप्रधान ने एक एक जाति को निज निज भाग बाँट दिया, और आदमियों को अलग अलग बसाया, तब उसने देश देश के लोगों की सीमाएँ इस्राएलियों की गिनती के अनुसार ठहराईं।
- Verse 9: क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याक़ूब उसका नपा हुआ निज भाग है।
- Verse 10: “उसने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजनेवालों से भरी हुई मरुभूमि में पाया; उसने उसके चारों ओर रहकर उसकी रक्षा की, और अपनी आँख की पुतली के समान उसकी सुधि रखी।
- Verse 11: जैसे उकाब अपने घोंसले को हिला हिलाकर अपने बच्चों के ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उसने अपने पंख फैलाकर उसको अपने परों पर उठा लिया।
- Verse 12: यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा, और उसके संग कोई पराया देवता न था।
- Verse 13: उसने उसको पृथ्वी के ऊँचे ऊँचे स्थानों पर सवार कराया, और उसको खेतों की उपज खिलाई; उसने उसे चट्टान में से मधु और चकमक की चट्टान में से तेल चुसाया।
- Verse 14: गायों का दही, और भेड़–बकरियों का दूध, मेम्नों की चर्बी, बकरे और बाशान की जाति के मेढ़े, और गेहूँ का उत्तम से उत्तम आटा भी; और तू दाखरस का मधु पिया करता था।
- Verse 15: “परन्तु यशूरून मोटा होकर लात मारने लगा; तू मोटा और हृष्ट–पुष्ट हो गया, और चर्बी से छा गया है; तब उसने अपने सृजनहार ईश्वर को तज दिया, और अपने उद्धारमूल चट्टान को तुच्छ जाना।
- Verse 16: उन्होंने पराए देवताओं को मानकर उसमें जलन उपजाई; और घृणित कर्म करके उसको रिस दिलाई।
- Verse 17: उन्होंने पिशाचों के लिये जो ईश्वर न थे बलि चढ़ाए, और उनके लिये वे अनजाने देवता थे, वे तो नये नये देवता थे जो थोड़े ही दिन से प्रकट हुए थे, और जिनसे उनके पुरखा कभी डरे नहीं।
- Verse 18: जिस चट्टान से तू उत्पन्न हुआ उसको तू भूल गया, और ईश्वर जिससे तेरी उत्पत्ति हुई उसको भी तू भूल गया है।
- Verse 19: “इन बातों को देखकर यहोवा ने उन्हें तुच्छ जाना, क्योंकि उसके बेटे–बेटियों ने उसे रिस दिलाई थी।
- Verse 20: तब उसने कहा, ‘मैं उनसे अपना मुख छिपा लूँगा, और देखूँगा कि उनका अन्त कैसा होगा, क्योंकि इस जाति के लोग बहुत टेढ़े हैं और धोखा देनेवाले पुत्र हैं।
- Verse 21: उन्होंने ऐसी वस्तु मानकर जो ईश्वर नहीं है, मुझ में जलन उत्पन्न की, और अपनी व्यर्थ वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाई। इसलिये मैं भी उनके द्वारा जो मेरी प्रजा नहीं हैं उनके मन में जलन उत्पन्न करूँगा; और एक मूढ़ जाति के द्वारा उन्हें रिस दिलाऊँगा।
- Verse 22: क्योंकि मेरे कोप की आग भड़क उठी है, जो पाताल की तह तक जलती जाएगी, और पृथ्वी अपनी उपज समेत भस्म हो जाएगी, और पहाड़ों की नींवों में भी आग लगा देगी।
- Verse 23: “ ‘मैं उन पर विपत्ति पर विपत्ति भेजूँगा; और उन पर मैं अपने सब तीरों को छोड़ूँगा।
- Verse 24: वे भूख से दुबले हो जाएँगे, और अंगारों से और कठिन महारोगों से ग्रसित हो जाएँगे; और मैं उन पर पशुओं के दाँत लगवाऊँगा, और धूलि पर रेंगनेवाले सर्पों का विष छोड़ दूँगा।
- Verse 25: बाहर वे तलवार से मरेंगे, और कोठरियों के भीतर भय से; क्या कुँवारे और क्या कुँवारियाँ, क्या दूध पीता हुआ बच्चा और क्या पक्के बालवाले, सब इसी प्रकार बरबाद होंगे।
- Verse 26: मैं ने कहा था, कि मैं उनको दूर दूर तक तितर–बितर करूँगा, और मनुष्यों में से उनका स्मरण तक मिटा डालूँगा;
- Verse 27: परन्तु मुझे शत्रुओं की छेड़–छाड़ का डर था, ऐसा न हो कि द्रोही इसको उलटा समझकर यह कहने लगें, ‘हम अपने ही बाहुबल से प्रबल हुए, और यह सब यहोवा से नहीं हुआ।’
- Verse 28: “यह जाति युक्तिहीन तो है, और इनमें समझ है ही नहीं।
- Verse 29: भला होता कि ये बुद्धिमान होते, कि इसको समझ लेते, और अपने अन्त का विचार करते!
- Verse 30: यदि उनकी चट्टान ही उनको न बेच देती, और यहोवा उनको दूसरों के हाथ में न कर देता; तो यह कैसे हो सकता कि उनके हज़ार का पीछा एक मनुष्य करता, और उनके दस हज़ार को दो मनुष्य भगा देते?
- Verse 31: क्योंकि जैसी हमारी चट्टान है वैसी उनकी चट्टान नहीं है, चाहे हमारे शत्रु ही क्यों न न्यायी हों।
- Verse 32: क्योंकि उनकी दाखलता सदोम की दाखलता से निकली, और अमोरा की दाख की बारियों में की है; उनकी दाख विषभरी, और उनके गुच्छे कड़ुवे हैं,
- Verse 33: उनका दाखमधु साँपों का सा विष, और काले नागों का सा हलाहल है।
- Verse 34: “क्या यह बात मेरे मन में संचित, और मेरे भण्डारों में मुहरबन्द नहीं है?
- Verse 35: पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है, यह उनके पाँव फिसलने के समय प्रगट होगा; क्योंकि उनकी विपत्ति का दिन निकट है, और जो दु:ख उन पर पड़नेवाले हैं वे शीघ्र आ रहे हैं।
- Verse 36: क्योंकि जब यहोवा देखेगा कि मेरी प्रजा की शक्ति जाती रही, और क्या बन्धुआ और क्या स्वाधीन, उनमें कोई बचा नहीं रहा, तब यहोवा अपने लोगों का न्याय करेगा, और अपने दासों के विषय तरस खाएगा।
- Verse 37: तब वह कहेगा, उनके देवता कहाँ हैं, अर्थात् वह चट्टान कहाँ जिस पर उनका भरोसा था,
- Verse 38: जो उनके बलिदानों की चर्बी खाते, और उनके तपावनों का दाखमधु पीते थे? वे ही उठकर तुम्हारी सहायता करें, और तुम्हारी आड़ हों!
- Verse 39: “इसलिये अब तुम देख लो कि मैं ही वह हूँ, और मेरे संग कोई देवता नहीं; मैं ही मार डालता, और मैं जिलाता भी हूँ; मैं ही घायल करता, और मैं ही चंगा भी करता हूँ; और मेरे हाथ से कोई नहीं छुड़ा सकता।
- Verse 40: क्योंकि मैं अपना हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर कहता हूँ, क्योंकि मैं अनन्त काल के लिये जीवित हूँ,
- Verse 41: इसलिये यदि मैं बिजली की तलवार पर सान धरकर झलकाऊँ, और न्याय अपने हाथ में ले लूँ, तो अपने द्रोहियों से बदला लूँगा, और अपने बैरियों को बदला दूँगा।
- Verse 42: मैं अपने तीरों को लहू से मतवाला करूँगा, और मेरी तलवार मांस खाएगी— वह लहू मारे हुओं और बन्दियों का, और वह मांस शत्रुओं के लम्बे बाल वाले प्रधानों का होगा।’
- Verse 43: “हे जाति जाति के लोगो, उसकी प्रजा के साथ आनन्द मनाओ; क्योंकि वह अपने दासों के लहू का पलटा लेगा, और अपने द्रोहियों को बदला देगा, और अपने देश और अपनी प्रजा के पाप के लिये प्रायश्चित्त देगा।”
- Verse 44: इस गीत के सब वचन मूसा ने नून के पुत्र होशे समेत आकर लोगों को सुनाए।
- Verse 45: जब मूसा ये सब वचन सब इस्राएलियों से कह चुका,
- Verse 46: तब उसने उनसे कहा, “जितनी बातें मैं आज तुम से चिताकर कहता हूँ उन सब पर अपना अपना मन लगाओ, और उनके अर्थात् इस व्यवस्था की सारी बातों के मानने में चौकसी करने की आज्ञा अपने बच्चों को दो।
- Verse 47: क्योंकि यह तुम्हारे लिये व्यर्थ काम नहीं, परन्तु तुम्हारा जीवन ही है, और ऐसा करने से उस देश में तुम्हारी आयु के दिन बहुत होंगे, जिसके अधिकारी होने को तुम यरदन पार जा रहे हो।”
- Verse 48: फिर उसी दिन यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 49: “उस अबारीम पहाड़ की नबो नामक चोटी पर, जो मोआब देश में यरीहो के सामने है, चढ़कर कनान देश, जिसे मैं इस्राएलियों की निज भूमि कर देता हूँ, उसको देख ले।
- Verse 50: तब जैसे तेरा भाई हारून होर पहाड़ पर मरकर अपने लोगों में मिल गया, वैसा ही तू इस पहाड़ पर चढ़कर मर जाएगा, और अपने लोगों में मिल जाएगा।
- Verse 51: इसका कारण यह है कि सीन जंगल में, कादेश के मरीबा नामक सोते पर, तुम दोनों ने मेरा अपराध किया, क्योंकि तुम ने इस्राएलियों के मध्य में मुझे पवित्र न ठहराया।
- Verse 52: इसलिये वह देश जो मैं इस्राएलियों को देता हूँ, तू अपने सामने देख लेगा, परन्तु वहाँ जाने न पाएगा।”