पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 144
- Verse 1: धन्य है यहोवा, जो मेरी चट्टान है, वह मेरे हाथों को लड़ने, और युद्ध करने के लिये तैयार करता है।
- Verse 2: वह मेरे लिये करुणानिधान और गढ़, ऊँचा स्थान और छुड़ानेवाला है, वह मेरी ढाल और शरणस्थान है, जो मेरी प्रजा को मेरे वश में कर देता है।
- Verse 3: हे यहोवा, मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है, या आदमी क्या है कि तू उसकी कुछ चिन्ता करता है?
- Verse 4: मनुष्य तो साँस के समान है; उसके दिन ढलती हुई छाया के समान हैं।
- Verse 5: हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ! पहाड़ों को छू, तब उनसे धुआँ उठेगा!
- Verse 6: बिजली कड़काकर उनको तितर बितर कर दे, अपने तीर चलाकर उनको घबरा दे!
- Verse 7: अपने हाथ ऊपर से बढ़ाकर मुझे महासागर से उबार, अर्थात् परदेशियों के वश से छुड़ा।
- Verse 8: उनके मुँह से तो व्यर्थ बातें निकलती हैं, और उनके दाहिने हाथ से धोखे के काम होते हैं।
- Verse 9: हे परमेश्वर, मैं तेरी स्तुति का नया गीत गाऊँगा; मैं दस तारवाली सारंगी बजाकर तेरा भजन गाऊँगा।
- Verse 10: तू राजाओं का उद्धार करता है, और अपने दास दाऊद को तलवार की मार से बचाता है।
- Verse 11: तू मुझ को उबार और परदेशियों के वश से छुड़ा ले, जिन के मुँह से व्यर्थ बातें निकलती हैं, और जिनका दाहिना हाथ झूठ का दाहिना हाथ है।
- Verse 12: जब हमारे बेटे जवानी के समय पौधों के समान बढ़े हुए हों, और हमारी बेटियाँ उन कोनेवाले खम्भों के समान हों, जो महल के लिए बनाए जाएँ;
- Verse 13: जब हमारे खत्ते भरे रहें, और उन में भाँति भाँति का अन्न रखा जाए, और हमारी भेड़–बकरियाँ हमारे मैदानों में हज़ारों हज़ार बच्चे जनें;
- Verse 14: जब हमारे बैल खूब लदे हुए हों; जब हमें न विघ्न हो और न हमारा कहीं जाना हो, और न हमारे चौकों में रोना–पीटना हो,
- Verse 15: तो इस दशा में जो राज्य हो वह क्या ही धन्य होगा! जिस राज्य का परमेश्वर यहोवा है, वह क्या ही धन्य है!