पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
गिनती
अध्याय 31
- Verse 1: फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 2: “मिद्यानियों से इस्राएलियों का बदला ले; बाद को तू अपने लोगों में जा मिलेगा।”
- Verse 3: तब मूसा ने लोगों से कहा, “अपने में से पुरुषों को युद्ध के लिये हथियार धारण कराओ कि वे मिद्यानियों पर चढ़के उनसे यहोवा का बदला लें।
- Verse 4: इस्राएल के सब गोत्रों में से प्रत्येक गोत्र के एक एक हज़ार पुरुषों को युद्ध करने के लिये भेजो।”
- Verse 5: तब इस्राएल के सब गोत्रों में से प्रत्येक गोत्र के एक एक हज़ार पुरुष चुने गये, अर्थात् युद्ध के लिये हथियार–बन्द बारह हज़ार पुरुष।
- Verse 6: प्रत्येक गोत्र में से उन हज़ार हज़ार पुरुषों को, और एलीआज़ार याजक के पुत्र पीनहास को, मूसा ने युद्ध करने के लिये भेजा, और उसके हाथ में पवित्रस्थान के पात्र और वे तुरहियाँ थीं जो साँस बाँध बाँध कर फूँकी जाती थीं।
- Verse 7: और जो आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी थी, उसके अनुसार उन्होंने मिद्यानियों से युद्ध करके सब पुरुषों को घात किया।
- Verse 8: और दूसरे जूझे हुओं को छोड़ उन्होंने एबी, रेकेम, सूर, हूर, और रेबा नामक मिद्यान के पाँचों राजाओं को घात किया; और बोर के पुत्र बिलाम को भी उन्होंने तलवार से घात किया।
- Verse 9: और इस्राएलियों ने मिद्यानी स्त्रियों को बाल–बच्चों समेत बन्दी बना लिया; और उनके गाय–बैल, भेड़–बकरी, और उनकी सारी सम्पत्ति को लूट लिया।
- Verse 10: और उनके निवास के सब नगरों, और सब छावनियों को फूँक दिया;
- Verse 11: तब वे, क्या मनुष्य क्या पशु, सब बन्दियों और सारी लूट–पाट को लेकर
- Verse 12: यरीहो के पास की यरदन नदी के तट पर, मोआब के अराबा में, छावनी के निकट, मूसा और एलीआज़ार याजक और इस्राएलियों की मण्डली के पास आए।
- Verse 13: तब मूसा और एलीआज़ार याजक और मण्डली के सब प्रधान छावनी के बाहर उनका स्वागत करने को निकले।
- Verse 14: और मूसा सहस्रपति–शतपति आदि, सेनापतियों से, जो युद्ध करके लौटे आते थे क्रोधित होकर कहने लगा,
- Verse 15: “क्या तुम ने सब स्त्रियों को जीवित छोड़ दिया?
- Verse 16: देखो, बिलाम की सम्मति से, पोर के विषय में इस्राएलियों से यहोवा का विश्वासघात इन्हीं ने कराया, और यहोवा की मण्डली में मरी फैली।
- Verse 17: इसलिये अब बाल–बच्चों में से हर एक लड़के को, और जितनी स्त्रियों ने पुरुष का मुँह देखा हो उन सभों को घात करो।
- Verse 18: परन्तु जितनी लड़कियों ने पुरुष का मुँह न देखा हो उन सभों को तुम अपने लिये जीवित रखो।
- Verse 19: और तुम लोग सात दिन तक छावनी के बाहर रहो, और तुम में से जितनों ने किसी प्राणी को घात किया, और जितनों ने किसी मरे हुए को छूआ हो, वे सब अपने अपने बन्दियों समेत तीसरे और सातवें दिनों में अपने अपने को पाप छुड़ाकर पावन करें।
- Verse 20: और सब वस्त्रों, और चमड़े की बनी हुई सब वस्तुओं, और बकरी के बालों की और लकड़ी की बनी हुई सब वस्तुओं को पावन कर लो।”
- Verse 21: तब एलीआज़ार याजक ने सेना के उन पुरुषों से जो युद्ध करने गए थे कहा, “व्यवस्था की जिस विधि की आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी है वह यह है :
- Verse 22: सोना, चाँदी, पीतल, लोहा, टीन, और सीसा,
- Verse 23: जो कुछ आग में ठहर सके उसको आग में डालो, तब वह शुद्ध ठहरेगा; तौभी वह अशुद्धता से छुड़ानेवाले जल के द्वारा पावन किया जाए; परन्तु जो कुछ आग में न ठहर सके उसे जल में डुबाओ।
- Verse 24: और सातवें दिन अपने वस्त्रों को धोना, तब तुम शुद्ध ठहरोगे; और तब छावनी में आना।”
- Verse 25: फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 26: “एलीआज़ार याजक और मण्डली के पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुषों को साथ लेकर तू लूट के मनुष्यों और पशुओं की गिनती कर;
- Verse 27: तब उनको आधा–आधा करके एक भाग उन सिपाहियों को जो युद्ध करने को गए थे, और दूसरा भाग मण्डली को दे।
- Verse 28: फिर जो सिपाही युद्ध करने को गए थे, उनके आधे में से यहोवा के लिये, क्या मनुष्य, क्या गाय–बैल, क्या गदहे, क्या भेड़–बकरियाँ,
- Verse 29: पाँच सौ के पीछे एक को कर मानकर ले ले; और यहोवा की भेंट करके एलीआज़ार याजक को दे दे।
- Verse 30: फिर इस्राएलियों के आधे में से, क्या मनुष्य, क्या गाय–बैल, क्या गदहे, क्या भेड़–बकरियाँ, क्या किसी प्रकार का पशु हो, पचास पीछे एक लेकर यहोवा के निवास की रखवाली करनेवाले लेवियों को दे।”
- Verse 31: यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार जो उसने मूसा को दी, मूसा और एलीआज़ार याजक ने किया।
- Verse 32: जो वस्तुएँ सेना के पुरुषों ने अपने अपने लिये लूट ली थीं उनसे अधिक की लूट यह थी; अर्थात् छ: लाख पचहत्तर हज़ार भेड़–बकरियाँ,
- Verse 33: बहत्तर हज़ार गाय–बैल,
- Verse 34: इकसठ हज़ार गदहे,
- Verse 35: और मनुष्यों में से जिन स्त्रियों ने पुरुष का मुँह नहीं देखा था वह सब बत्तीस हज़ार थीं।
- Verse 36: और इसका आधा, अर्थात् उनका भाग जो युद्ध करने को गए थे, उसमें भेड़–बकरियाँ तीन लाख साढ़े सैंतीस हज़ार,
- Verse 37: जिनमें से पौने सात सौ भेड़–बकरियाँ यहोवा का कर ठहरीं।
- Verse 38: और गाय–बैल छत्तीस हज़ार, जिनमें से बहत्तर यहोवा का कर ठहरे।
- Verse 39: और गदहे साढ़े तीस हज़ार, जिनमें से इकसठ यहोवा का कर ठहरे।
- Verse 40: और मनुष्य सोलह हज़ार जिन में से बत्तीस प्राणी यहोवा का कर ठहरे।
- Verse 41: इस कर को जो यहोवा की भेंट थी मूसा ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार एलीआज़ार याजक को दिया।
- Verse 42: इस्राएलियों की मण्डली का आधा
- Verse 43: तीन लाख साढ़े सैंतीस हज़ार भेड़–बकरियाँ,
- Verse 44: छत्तीस हज़ार गाय–बैल,
- Verse 45: साढ़े तीस हज़ार गदहे,
- Verse 46: और सोलह हज़ार मनुष्य हुए।
- Verse 47: इस आधे में से, जिसे मूसा ने युद्ध करनेवाले पुरुषों के पास से अलग किया था, यहोवा की आज्ञा के अनुसार मूसा ने, क्या मनुष्य क्या पशु, पचास पीछे एक लेकर यहोवा के निवास की रखवाली करनेवाले लेवियों को दिया।
- Verse 48: तब सहस्रपति–शतपति आदि, जो सरदार सेना के हज़ारों के ऊपर नियुक्त थे, वे मूसा के पास आकर कहने लगे,
- Verse 49: “जो सिपाही हमारे अधीन थे उनकी तेरे दासों ने गिनती ली, और उनमें से एक भी नहीं घटा।
- Verse 50: इसलिये पायजेब, कड़े, मुंदरियाँ, बालियाँ, बाजूबन्द, सोने के जो गहने, जिसने पाया है, उनको हम यहोवा के सामने अपने प्राणों के निमित्त प्रायश्चित्त करने को यहोवा की भेंट करके ले आए हैं।
- Verse 51: तब मूसा और एलीआज़ार याजक ने उन से वे सब सोने के नक्काशीदार गहने ले लिए।
- Verse 52: और सहस्रपतियों और शतपतियों ने जो भेंट का सोना यहोवा की भेंट करके दिया वह सब का सब सोलह हज़ार साढ़े सात सौ शेकेल था। (
- Verse 53: योद्धाओं ने तो अपने अपने लिये लूट ले ली थी।)
- Verse 54: यह सोना मूसा और एलीआज़ार याजक ने सहस्रपतियों और शतपतियों से लेकर मिलापवाले तम्बू में पहुँचा दिया कि इस्राएलियों के लिये यहोवा के सामने स्मरण दिलानेवाली वस्तु ठहरे।