வேதாகமம்
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 66
1 : हे सारी पृथ्वी के लोगो, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो;
2 : उसके नाम की महिमा का भजन गाओ; उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।
3 : परमेश्वर से कहो, “तेरे काम क्या ही भयानक हैं! तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।
4 : सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत् करेंगे, और तेरा भजन गाएँगे; वे तेरे नाम का भजन गाएँगे।” (सेला)
5 : आओ परमेश्वर के कामों को देखो; वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।
6 : उसने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला; वे महानद में से पाँव पाँव पार उतरे। वहाँ हम उसके कारण आनन्दित हुए,
7 : जो अपने पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आँखों से जाति जाति को ताकता है। हठीले अपने सिर न उठाएँ। (सेला)
8 : हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,
9 : जो हम को जीवित रखता है; और हमारे पाँव को टलने नहीं देता।
10 : क्योंकि हे परमेश्वर, तू ने हम को जाँचा; तू ने हमें चाँदी के समान ताया था।
11 : तू ने हम को जाल में फँसाया; और हमारी कटि पर भारी बोझ बाँधा था;
12 : तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए; परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है।
13 : मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊँगा; मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूँगा,
14 : जो मैं ने मुँह खोलकर मानीं, और संकट के समय कही थीं।
15 : मैं तुझे मोटे पशुओं की होमबलि, मेंढ़ों की चर्बी की धूप समेत चढ़ाऊँगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊँगा। (सेला)
16 : हे परमेश्वर के सब डरवैयो, आकर सुनो, मैं बताऊँगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है।
17 : मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ।
18 : यदि मैं मन में अनर्थ की बात सोचता, तो प्रभु मेरी न सुनता।
19 : परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।
20 : धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करुणा दूर कर दी है!