पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
व्यवस्थाविवरण
अध्याय 25
- Verse 1: “यदि मनुष्यों के बीच कोई झगड़ा हो, और वे न्याय करवाने के लिये न्यायियों के पास जाएँ, और वे उनका न्याय करें, तो निर्दोष को निर्दोष और दोषी को दोषी ठहराएँ,
- Verse 2: और यदि दोषी मार खाने के योग्य ठहरे, तो न्यायी उसको गिरवाकर अपने सामने जैसा उसका दोष हो उसके अनुसार कोड़े गिन गिनकर लगवाए।
- Verse 3: वह उसे चालीस कोड़े तक लगवा सकता है, इससे अधिक नहीं लगवा सकता; ऐसा न हो कि इससे अधिक बहुत मार खिलवाने से तेरा भाई तेरी दृष्टि में तुच्छ ठहरे।
- Verse 4: “दाँवते समय चलते हुए बैल का मुँह न बान्धना।
- Verse 5: “जब कई भाई संग रहते हों, और उन में से एक निपुत्र मर जाए, तो उसकी स्त्री का विवाह परगोत्री से न किया जाए; उसके पति का भाई उसके पास जाकर उसे अपनी पत्नी कर ले, और उससे पति के भाई का धर्म पालन करे।
- Verse 6: और जो पहला बेटा उस स्त्री से उत्पन्न हो वह उस मरे हुए भाई के नाम का ठहरे, जिससे कि उसका नाम इस्राएल में से मिट न जाए।
- Verse 7: यदि उस स्त्री के पति के भाई को उससे विवाह करना न भाए, तो वह स्त्री नगर के फाटक पर वृद्ध लोगों के पास जाकर कहे, ‘मेरे पति के भाई ने अपने भाई का नाम इस्राएल में बनाए रखने से मना कर दिया है, और मुझ से पति के भाई का धर्म पालन करना नहीं चाहता।’
- Verse 8: तब उस नगर के वृद्ध लोग उस पुरुष को बुलवाकर उसको समझाएँ; और यदि वह अपनी बात पर अड़ा रहे, और कहे, ‘मुझे इससे विवाह करना नहीं भावता,’
- Verse 9: तो उसके भाई की पत्नी उन वृद्ध लोगों के सामने उसके पास जाकर उसके पाँव से जूती उतारे, और उसके मुँह पर थूक दे; और कहे, ‘जो पुरुष अपने भाई के वंश को चलाना न चाहे उससे इसी प्रकार का व्यवहार किया जाएगा।’
- Verse 10: तब इस्राएल में उस पुरुष का यह नाम पड़ेगा, अर्थात् जूती उतारे हुए पुरुष का घराना।
- Verse 11: “यदि दो पुरुष आपस में मारपीट करते हों, और उनमें से एक की पत्नी अपने पति को मारनेवाले के हाथ से छुड़ाने के लिये पास जाए, और अपना हाथ बढ़ाकर उसके गुप्त अंग को पकड़े,
- Verse 12: तो उस स्त्री का हाथ काट डालना; उस पर तरस न खाना।
- Verse 13: “अपनी थैली में भाँति भाँति के, अर्थात् घटती–बढ़ती बटखरे न रखना।
- Verse 14: अपने घर में भाँति भाँति के, अर्थात् घटती–बढ़ती नपुए न रखना।
- Verse 15: तेरे बटखरे और नपुए पूरे पूरे और धर्म के हों; इसलिये कि जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसमें तेरी आयु बहुत हो।
- Verse 16: क्योंकि ऐसे कामों में जितने कुटिलता करते हैं, वे सब तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में घृणित हैं।
- Verse 17: “स्मरण रख कि जब तू मिस्र से निकलकर आ रहा था तब अमालेक ने तुझ से मार्ग में क्या किया,
- Verse 18: अर्थात् उनको परमेश्वर का भय न था; इस कारण उसने जब तू मार्ग में थका–माँदा था, तब तुझ पर चढ़ाई करके जितने निर्बल होने के कारण सबसे पीछे थे उन सभों को मारा।
- Verse 19: इसलिये जब तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में, जो वह तेरा भाग करके तेरे अधिकार में कर देता है, तुझे चारों ओर के सब शत्रुओं से विश्राम दे, तब अमालेक का नाम धरती पर से मिटा डालना; और तुम इस बात को न भूलना।