पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
नीतिवचन
अध्याय 7
- Verse 1: हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़।
- Verse 2: मेरी आज्ञाओं को मान, इस से तू जीवित रहेगा, और मेरी शिक्षा को अपनी आँख की पुतली जान;
- Verse 3: उनको अपनी उँगलियों में बाँध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले।
- Verse 4: बुद्धि से कह, “तू मेरी बहिन है,” और समझ को अपनी साथिन बना;
- Verse 5: तब तू पराई स्त्री से बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है।
- Verse 6: मैं ने एक दिन अपने घर की खिड़की से, अर्थात् अपने झरोखे से झाँका,
- Verse 7: तब मैं ने भोले लोगों में से एक निर्बुद्धि जवान को देखा;
- Verse 8: वह उस स्त्री के घर के कोने के पास की सड़क पर चला जाता था, और उसने उसके घर का मार्ग लिया।
- Verse 9: उस समय दिन ढल गया, और संध्याकाल आ गया था, वरन् रात का घोर अन्धकार छा गया था।
- Verse 10: और देखो, उससे एक स्त्री मिली, जिस का भेष वेश्या का सा था, और वह बड़ी धूर्त थी।
- Verse 11: वह शान्ति रहित और चंचल थी, और अपने घर में न ठहरती थी;
- Verse 12: कभी वह सड़क में, कभी चौक में पाई जाती थी, और एक एक कोने पर वह बाट जोहती थी।
- Verse 13: तब उसने उस जवान को पकड़कर चूमा, और निर्लज्जता की चेष्टा करके उससे कहा,
- Verse 14: “मुझे मेलबलि चढ़ाने थे, और मैं ने अपनी मन्नतें आज ही पूरी की हैं।
- Verse 15: इसी कारण मैं तुझ से भेंट करने को निकली, मैं तेरे दर्शन की खोजी थी, और अभी पाया है।
- Verse 16: मैं ने अपने पलंग के बिछौने पर मिस्र के बेलबूटेवाले कपड़े बिछाए हैं;
- Verse 17: मैं ने अपने बिछौने पर गन्धरस, अगर और दालचीनी छिड़की है।
- Verse 18: इसलिये अब चल हम प्रेम से भोर तक जी बहलाते रहें; हम परस्पर की प्रीति से आनन्दित रहें।
- Verse 19: क्योंकि मेरा पति घर में नहीं है; वह दूर देश को चला गया है;
- Verse 20: वह चाँदी की थैली ले गया है; और पूर्णमासी को लौट आएगा।”
- Verse 21: ऐसी बातें कह कहकर, उसने उसको अपनी प्रबल माया में फँसा लिया; और अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से उसको अपने वश में कर लिया।
- Verse 22: वह तुरन्त उसके पीछे हो लिया, जैसे बैल कसाई–खाने को, या जैसे बेड़ी पहिने हुए कोई मूढ़ ताड़ना पाने को जाता है।
- Verse 23: अन्त में उस जवान का कलेजा तीर से बेधा जाएगा; वह उस चिड़िया के समान है जो फन्दे की ओर वेग से उड़े और न जानती हो कि उसमें मेरे प्राण जाएँगे।
- Verse 24: अब हे मेरे पुत्रो, मेरी सुनो, और मेरी बातों पर मन लगाओ।
- Verse 25: तेरा मन ऐसी स्त्री के मार्ग की ओर न फिरे, और उसकी डगरों में भूल कर न जाना;
- Verse 26: क्योंकि बहुत से लोग उस के द्वारा मारे पड़े हैं; उसके घात किए हुओं की एक बड़ी संख्या होगी।
- Verse 27: उसका घर अधोलोक का मार्ग है, वह मृत्यु के घर में पहुँचाता है।