पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
निर्गमन
अध्याय 29
- Verse 1: “उन्हें पवित्र करने को जो काम तुझे उन के साथ करना है कि वे मेरे लिये याजक का काम करें, वह यह है : एक निर्दोष बछड़ा और दो निर्दोष मेढ़े लेना,
- Verse 2: और अख़मीरी रोटी, और तेल से सने हुए मैदे के अख़मीरी फुलके, और तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी पपड़ियाँ भी लेना। ये सब गेहूँ के मैदे के बनवाना।
- Verse 3: इनको एक टोकरी में रखकर उस टोकरी को उस बछड़े और उन दोनों मेढ़ों समेत समीप ले आना।
- Verse 4: फिर हारून और उसके पुत्रों को मिलापवाले तम्बू के द्वार के समीप ले आकर जल से नहलाना।
- Verse 5: तब उन वस्त्रों को लेकर हारून को अंगरखा और एपोद का बागा पहिनाना, और एपोद और चपरास बाँधना, और एपोद का काढ़ा हुआ पट्टा भी बाँधना;
- Verse 6: और उसके सिर पर पगड़ी को रखना, और पगड़ी पर पवित्र मुकुट को रखना।
- Verse 7: तब अभिषेक का तेल ले उसके सिर पर डालकर उसका अभिषेक करना।
- Verse 8: फिर उसके पुत्रों को समीप ले आकर उनको अंगरखे पहिनाना,
- Verse 9: और उनके अर्थात् हारून और उसके पुत्रों की कमर बाँधना और उनके सिर पर टोपियाँ रखना; जिससे याजक के पद पर सदा उनका हक रहे। इस प्रकार हारून और उसके पुत्रों का संस्कार करना।
- Verse 10: “तब बछड़े को मिलापवाले तम्बू के सामने समीप ले आना। हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने अपने हाथ रखें,
- Verse 11: तब उस बछड़े को यहोवा के सम्मुख मिलापवाले तम्बू के द्वार पर बलि करना,
- Verse 12: और बछड़े के लहू में से कुछ लेकर अपनी उंगली से वेदी के सींगों पर लगाना, और शेष सब लहू को वेदी के पाए पर उंडेल देना,
- Verse 13: और जिस चरबी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं, और जो झिल्ली कलेजे के ऊपर होती है, उनको और दोनों गुर्दों को उनके ऊपर की चरबी समेत लेकर सब को वेदी पर जलाना।
- Verse 14: परन्तु बछड़े का मांस, और खाल, और गोबर, छावनी से बाहर आग में जला देना; क्योंकि यह पापबलि होगा।
- Verse 15: “फिर एक मेढ़ा लेना, और हारून और उसके पुत्र उसके सिर पर अपने अपने हाथ रखें,
- Verse 16: तब उस मेढ़े को बलि करना, और उसका लहू लेकर वेदी पर चारों ओर छिड़कना।
- Verse 17: तब उस मेढ़े को टुकड़े टुकड़े काटना, और उसकी अंतड़ियों और पैरों को धोकर उसके टुकड़ों और सिर के ऊपर रखना,
- Verse 18: और उस पूरे मेढ़े को वेदी पर जलाना; वह तो यहोवा के लिये होमबलि होगा; वह सुखदायक सुगन्ध और यहोवा के लिये हवन होगा।
- Verse 19: “फिर दूसरे मेढ़े को लेना; और हारून और उसके पुत्र उसके सिर पर अपने अपने हाथ रखें,
- Verse 20: तब उस मेढ़े को बलि करना, और उसके लहू में से कुछ लेकर हारून और उसके पुत्रों के दाहिने कान के सिरे पर, और उनके दाहिने हाथ और दाहिने पाँव के अंगूठों पर लगाना, और लहू को वेदी पर चारों ओर छिड़क देना।
- Verse 21: फिर वेदी पर के लहू और अभिषेक के तेल, इन दोनों में से कुछ कुछ लेकर हारून और उसके वस्त्रों पर, और उसके पुत्रों और उनके वस्त्रों पर भी छिड़क देना; तब वह अपने वस्त्रों समेत, और उसके पुत्र भी अपने अपने वस्त्रों समेत पवित्र हो जाएँगे।
- Verse 22: तब मेढ़े को संस्कार–वाला जानकर उसमें से चरबी और मोटी पूँछ को, और जिस चरबी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं उसको, और कलेजे पर की झिल्ली को, और चरबी समेत दोनों गुर्दों को, और दाहिने पुट्ठे को लेना,
- Verse 23: और अख़मीरी रोटी की टोकरी जो यहोवा के आगे धरी होगी उसमें से भी एक रोटी, और तेल से सने हुए मैदे का एक फुलका, और एक पपड़ी लेकर,
- Verse 24: इन सब को हारून और उसके पुत्रों के हाथों में रखकर हिलाए जाने की भेंट ठहराके यहोवा के आगे हिलाया जाए।
- Verse 25: तब उन वस्तुओं को उनके हाथों से लेकर होमबलि की वेदी पर जला देना, जिससे वह यहोवा के सामने सुखदायक सुगन्ध ठहरे; वह यहोवा के लिये हवन होगा।
- Verse 26: “फिर हारून के संस्कार का जो मेढ़ा होगा उसकी छाती को लेकर हिलाए जाने की भेंट के लिये यहोवा के आगे हिलाना; और वह तेरा भाग ठहरेगा।
- Verse 27: और हारून और उसके पुत्रों के संस्कार का जो मेढ़ा होगा, उसमें से हिलाए जाने की भेंटवाली छाती जो हिलाई जाएगी, और उठाए जाने का भेंटवाला पुट्ठा जो उठाया जाएगा, इन दोनों को पवित्र ठहराना।
- Verse 28: और ये सदा की विधि की रीति पर इस्राएलियों की ओर से उसका और उसके पुत्रों का भाग ठहरे, क्योंकि ये उठाए जाने की भेंटें ठहरी हैं; और यह इस्राएलियों की ओर से उनके मेलबलियों में से यहोवा के लिये उठाए जाने की भेंट होगी।
- Verse 29: “हारून के जो पवित्र वस्त्र होंगे वह उसके बाद उसके बेटे पोते आदि को मिलते रहें, जिससे उन्हीं को पहिने हुए उनका अभिषेक और संस्कार किया जाए।
- Verse 30: उसके पुत्रों में से जो उसके स्थान पर याजक होगा, वह जब पवित्रस्थान में सेवा टहल करने को मिलापवाले तम्बू में पहले आए, तब उन वस्त्रों को सात दिन तक पहिने रहे।
- Verse 31: “फिर याजक के संस्कार का जो मेढ़ा होगा उसे लेकर उसका मांस किसी पवित्रस्थान में पकाना;
- Verse 32: तब हारून अपने पुत्रों समेत उस मेढ़े का मांस और टोकरी की रोटी, दोनों को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खाए।
- Verse 33: जिन पदार्थों से उनका संस्कार और उन्हें पवित्र करने के लिये प्रायश्चित्त किया जाएगा उनको तो वे खाएँ, परन्तु पराए कुल का कोई उन्हें न खाने पाए, क्योंकि वे पवित्र होंगे।
- Verse 34: यदि संस्कारवाले मांस या रोटी में से कुछ सबेरे तक बचा रहे, तो उस बचे हुए को आग में जलाना, वह खाया न जाए; क्योंकि वह पवित्र होगा।
- Verse 35: “मैं ने तुझे जो जो आज्ञा दी है; उन सभों के अनुसार तू हारून और उसके पुत्रों से करना; और सात दिन तक उनका संस्कार करते रहना,
- Verse 36: अर्थात् पापबलि का एक बछड़ा प्रायश्चित्त के लिये प्रतिदिन चढ़ाना। वेदी को भी प्रायश्चित्त करने के समय शुद्ध करना, और उसे पवित्र करने के लिये उसका अभिषेक करना।
- Verse 37: सात दिन तक वेदी के लिये प्रायश्चित्त करके उसे पवित्र करना, और वेदी परमपवित्र ठहरेगी; और जो कुछ उस से छू जाएगा वह भी पवित्र हो जाएगा।
- Verse 38: “जो तुझे वेदी पर नित्य चढ़ाना होगा वह यह है : प्रतिदिन एक एक वर्ष के दो भेड़ के बच्चे।
- Verse 39: एक भेड़ के बच्चे को तो भोर के समय, और दूसरे भेड़ के बच्चे को गोधूलि के समय चढ़ाना;
- Verse 40: और पहले भेड़ के बच्चे के संग हीन की चौथाई कूटके निकाले हुए तेल से सना हुआ एपा का दसवाँ भाग मैदा, और अर्घ के लिये हीन की चौथाई दाखमधु देना।
- Verse 41: और दूसरे भेड़ के बच्चे को गोधूलि के समय चढ़ाना, और उसके साथ भोर की रीति अनुसार अन्नबलि और अर्घ दोनों देना, जिस से वह सुखदायक सुगन्ध और यहोवा के लिये हवन ठहरे।
- Verse 42: तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी में यहोवा के आगे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर नित्य ऐसा ही होमबलि हुआ करे; यह वह स्थान है जिसमें मैं तुम लोगों से इसलिये मिला करूँगा कि तुझ से बातें करूँ।
- Verse 43: मैं इस्राएलियों से वहीं मिला करूँगा और वह तम्बू मेरे तेज से पवित्र किया जाएगा;
- Verse 44: और मैं मिलापवाले तम्बू और वेदी को पवित्र करूँगा, और हारून और उसके पुत्रों को भी पवित्र करूँगा कि वे मेरे लिये याजक का काम करें।
- Verse 45: और मैं इस्राएलियों के मध्य निवास करूँगा, और उनका परमेश्वर ठहरूँगा।
- Verse 46: तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा उनका परमेश्वर हूँ, जो उनको मिस्र देश से इसलिये निकाल ले आया कि उनके मध्य निवास करूँ; मैं ही उनका परमेश्वर यहोवा हूँ।