ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
2 राजाओं
अध्याय 11
- Verse 1: जब अहज्याह की माता अतल्याह ने देखा कि उसका पुत्र मर गया, तब उसने पूरे राजवंश को नष्ट कर डाला।
- Verse 2: परन्तु यहोशेबा जो राजा योराम की बेटी, और अहज्याह की बहिन थी, उसने अहज्याह के पुत्र योआश को घात होनेवाले राजकुमारों के बीच में से चुराकर धाई समेत बिछौने रखने की कोठरी में छिपा दिया। और उन्होंने उसे अतल्याह से ऐसा छिपा रखा कि वह मारा न गया।
- Verse 3: वह उसके पास यहोवा के भवन में छ: वर्ष छिपा रहा, और अतल्याह देश पर राज्य करती रही।
- Verse 4: सातवें वर्ष में यहोयादा ने अंगरक्षकों और पहरुओं के शतपतियों को बुला भेजा, और उनको यहोवा के भवन में अपने पास ले आया; और उनसे वाचा बाँधी और यहोवा के भवन में उनको शपथ खिलाकर, उनको राजपुत्र दिखाया।
- Verse 5: और उसने उन्हें आज्ञा दी, “एक काम करो : अर्थात् तुम में से एक तिहाई लोग जो विश्रामदिन को आनेवाले हों, वे राजभवन का पहरा दें,
- Verse 6: और एक तिहाई लोग सूर नामक फाटक में ठहरे रहें, और एक तिहाई लोग पहरुओं के पीछे के फाटक में रहें; यों तुम भवन की चौकसी करके लोगों को रोके रहना;
- Verse 7: और तुम्हारे दो दल जो विश्राम दिन को बाहर जानेवाले हों, वे राजा के आसपास होकर यहोवा के भवन की चौकसी करें।
- Verse 8: तुम अपने अपने हाथ में हथियार लिये हुए राजा के चारों ओर रहना, और जो कोई पाँतियों के भीतर घुसना चाहे वह मार डाला जाए, और तुम राजा के आते–जाते समय उसके संग रहना।”
- Verse 9: यहोयादा याजक की इन सब आज्ञाओं के अनुसार शतपतियों ने किया। वे विश्रामदिन को आनेवाले और जानेवाले दोनों दलों के अपने अपने जनों को संग लेकर यहोयादा याजक के पास गए।
- Verse 10: तब याजक ने शतपतियों को राजा दाऊद के बर्छे, और ढालें जो यहोवा के भवन में थीं दे दीं।
- Verse 11: इसलिये वे पहरुए अपने अपने हाथ में हथियार लिए हुए भवन के दक्षिणी कोने से लेकर उत्तरी कोने तक वेदी और भवन के पास, राजा के चारों ओर उसको घेर कर खड़े हुए।
- Verse 12: तब उसने राजकुमार को बाहर लाकर उसके सिर पर मुकुट, और साक्षीपत्र रख दिया; तब लोगों ने उसका अभिषेक करके उसको राजा बनाया; फिर ताली बजा बजाकर बोल उठे, “राजा जीवित रहे!”
- Verse 13: जब अतल्याह को पहरुओं और लोगों की हलचल सुनाई पड़ी, तब वह उनके पास यहोवा के भवन में गई;
- Verse 14: और उसने क्या देखा कि राजा रीति के अनुसार खम्भे के पास खड़ा है, और राजा के पास प्रधान और तुरही बजानेवाले खड़े हैं, और सब लोग आनन्द करते और तुरहियाँ बजा रहे हैं। तब अतल्याह अपने वस्त्र फाड़कर “राजद्रोह! राजद्रोह!” पुकारने लगी।
- Verse 15: तब यहोयादा याजक ने दल के अधिकारी शतपतियों को आज्ञा दी, “उसे अपनी पाँतियों के बीच से निकाल ले जाओ; और जो कोई उसके पीछे चले उसे तलवार से मार डालो।” क्योंकि याजक ने कहा, “वह यहोवा के भवन में न मार डाली जाए।”
- Verse 16: इसलिये उन्होंने दोनों ओर से उसको जगह दी, और वह उस मार्ग के बीच से चली गई, जिससे घोड़े राजभवन में जाया करते थे; और वहाँ वह मार डाली गई।
- Verse 17: तब यहोयादा ने यहोवा के और राजा–प्रजा के बीच यहोवा की प्रजा होने की वाचा बन्धाई, और उसने राजा और प्रजा के मध्य भी वाचा बन्धाई।
- Verse 18: तब सब लोगों ने बाल के भवन को जाकर ढा दिया, और उसकी वेदियाँ और मूरतें भली भाँति तोड़ दीं; और मत्तान नामक बाल के याजक को वेदियों के सामने ही घात किया। तब याजक ने यहोवा के भवन पर अधिकारी ठहरा दिए।
- Verse 19: तब वह शतपतियों, अंगरक्षकों और पहरुओं और सब लोगों को साथ लेकर राजा को यहोवा के भवन से नीचे ले गया, और पहरुओं के फाटक के मार्ग से राजभवन को पहुँचा दिया। राजा राजगद्दी पर विराजमान हुआ।
- Verse 20: तब सब लोग आनन्दित हुए, और नगर में शान्ति हुई। अतल्याह तो राजभवन के पास तलवार से मार डाली गई थी।
- Verse 21: जब योआश राजा हुआ उस समय वह सात वर्ष का था।