வேதாகமம்
पुराना नियम
व्यवस्थाविवरण
अध्याय 14
- Verse 1: “तुम अपने परमेश्वर यहोवा के पुत्र हो; इसलिये मरे हुओं के कारण न तो अपना शरीर चीरना और न भौहों के बाल मुँड़ाना।
- Verse 2: क्योंकि तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिये एक पवित्र समाज है, और यहोवा ने तुझ को पृथ्वी भर के समस्त देशों के लोगों में से अपनी निज सम्पत्ति होने के लिये चुन लिया है।
- Verse 3: “तू कोई घिनौनी वस्तु न खाना।
- Verse 4: जो पशु तुम खा सकते हो वे ये हैं, अर्थात् गाय–बैल, भेड़–बकरी,
- Verse 5: हरिण, चिकारा, मृग, बनैली बकरी, सांभर, नीलगाय, और बनैली भेड़।
- Verse 6: अत: पशुओं में से जितने पशु चिरे या फटे खुरवाले और पागुर करनेवाले होते हैं उनका मांस तुम खा सकते हो।
- Verse 7: परन्तु पागुर करनेवाले या चिरे खुरवालों में से इन पशुओं को, अर्थात् ऊँट, खरहा, और शापान को न खाना, क्योंकि ये पागुर तो करते हैं परन्तु चिरे खुर के नहीं होते, इस कारण वे तुम्हारे लिये अशुद्ध हैं।
- Verse 8: फिर सूअर, जो चिरे खुर का तो होता है परन्तु पागुर नहीं करता, इस कारण वह तुम्हारे लिये अशुद्ध है। तुम न तो इनका मांस खाना, और न इनकी लोथ छूना।
- Verse 9: “फिर जितने जलजन्तु हैं उनमें से तुम इन्हें खा सकते हो, अर्थात् जितनों के पंख और छिलके होते हैं।
- Verse 10: परन्तु जितने बिना पंख और छिलके के होते हैं उन्हें तुम न खाना; क्योंकि वे तुम्हारे लिये अशुद्ध हैं।
- Verse 11: “सब शुद्ध पक्षियों का मांस तो तुम खा सकते हो।
- Verse 12: परन्तु इनका मांस न खाना, अर्थात् उकाब, हड़फोड़, कुरर;
- Verse 13: गरुड़, चील और भाँति भाँति के शाही,
- Verse 14: और भाँति भाँति के सब काग;
- Verse 15: शुतुर्मुर्ग, तहमास, जलकुक्कुट, और भाँति भाँति के बाज;
- Verse 16: छोटा और बड़ा दोनों जाति का उल्लू, और घुग्घू;
- Verse 17: धनेश, गिद्ध, हाड़गील;
- Verse 18: सारस, भाँति भाँति के बगुले, हुदहुद, और चमगादड़।
- Verse 19: और जितने रेंगने वाले जंतु हैं वे सब तुम्हारे लिये अशुद्ध हैं; वे खाए न जाएँ।
- Verse 20: परन्तु सब शुद्ध पंखवालों का मांस तुम खा सकते हो।
- Verse 21: “जो अपनी मृत्यु से मर जाए उसे तुम न खाना; उसे अपने फाटकों के भीतर किसी परदेशी को खाने के लिये दे सकते हो, या किसी पराए के हाथ बेच सकते हो; परन्तु तू तो अपने परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र समाज है। बकरी का बच्चा उसकी माता के दूध में न पकाना।
- Verse 22: “बीज की सारी उपज में से जो प्रतिवर्ष खेत में उपजे उसका दशमांश अवश्य अलग करके रखना।
- Verse 23: और जिस स्थान को तेरा परमेश्वर यहोवा अपने नाम का निवास ठहराने के लिये चुन ले उसमें अपने अन्न, और नये दाखमधु, और टटके तेल का दशमांश, और अपने गाय–बैलों और भेड़–बकरियों के पहिलौठे अपने परमेश्वर यहोवा के सामने खाया करना; जिस से तुम उसका भय नित्य मानना सीखोगे।
- Verse 24: परन्तु यदि वह स्थान जिसको तेरा परमेश्वर यहोवा अपना नाम बनाए रखने के लिये चुन लेगा बहुत दूर हो, और इस कारण वहाँ की यात्रा तेरे लिये इतनी लम्बी हो कि तू अपने परमेश्वर यहोवा की आशीष से मिली हुई वस्तुएँ वहाँ न ले जा सके,
- Verse 25: तो उसे बेचके, रुपये को बाँध, हाथ में लिये हुए उस स्थान पर जाना जो तेरा परमेश्वर यहोवा चुन लेगा,
- Verse 26: और वहाँ गाय–बैल, या भेड़–बकरी, या दाखमधु, या मदिरा, या किसी भाँति की वस्तु क्यों न हो, जो तेरा जी चाहे, उसे उसी रुपये से मोल लेकर अपने घराने समेत अपने परमेश्वर यहोवा के सामने खाकर आनन्द करना।
- Verse 27: और अपने फाटकों के भीतर के लेवीय को न छोड़ना, क्योंकि तेरे साथ उसका कोई भाग या अंश न होगा।
- Verse 28: “तीन तीन वर्ष के बीतने पर तीसरे वर्ष की उपज का सारा दशमांश निकालकर अपने फाटकों के भीतर इकट्ठा कर रखना;
- Verse 29: तब लेवीय जिसका तेरे संग कोई निज भाग या अंश न होगा वह, और जो परदेशी, और अनाथ, और विधवाएँ तेरे फाटकों के भीतर हों, वे भी आकर पेट भर खाएँ; जिससे तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में तुझे आशीष दे।