வேதாகமம்
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 148
1 : याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊँचे स्थानों में करो!
2 : हे उसके सब दूतो, उसकी स्तुति करो : हे उसकी सबसेना उसकी स्तुति करो!
3 : हे सूर्य और चंद्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!
4 : हे सबसे ऊँचे आकाश, और हे आकाश के ऊपरवाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो!
5 : वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।
6 : और उसने उनको सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है; और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।
7 : पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,
8 : हे अग्नि और ओलो, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन माननेवाली प्रचण्ड बयार!
9 : हे पहाड़ो और सब टीलो, हे फलदाई वृक्षो और सब देवदारो!
10 : हे वन–पशुओ और सब घरेलू पशुओ, हे रेंगनेवाले जन्तुओ और हे पक्षियो!
11 : हे पृथ्वी के राजाओ, और राज्य राज्य के सब लोगो, हे हाकिमो और पृथ्वी के सब न्यायियो!
12 : हे जवानो और कुमारियो, हे पुरनियो और बालको!
13 : यहोवा के नाम की स्तुति करो, क्योंकि केवल उसी का नाम महान् है; उसका ऐश्वर्य पृथ्वी और आकाश के ऊपर है।
14 : उसने अपनी प्रजा के लिये एक सींग ऊँचा किया है; यह उसके सब भक्तों के लिये अर्थात् इस्राएलियों के लिये और उसके समीप रहनेवाली प्रजा के लिये स्तुति करने का विषय है। याह की स्तुति करो!