పరిశుద్ధ గ్రంథము
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 147
1 : याह की स्तुति करो। क्योंकि अपने परमेश्वर का भजन गाना अच्छा है; क्योंकि वह मनभावना है, उसकी स्तुति करनी मनभावनी है।
2 : यहोवा यरूशलेम को बसा रहा है; वह निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठा कर रहा है।
3 : वह खेदित मनवालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम–पट्टी बाँधता है।
4 : वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है।
5 : हमारा प्रभु महान् और अति सामर्थी है; उसकी बुद्धि अपरम्पार है।
6 : यहोवा नम्र लोगों को सम्भालता है, और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है।
7 : धन्यवाद करते हुए यहोवा का गीत गाओ; वीणा बजाते हुए हमारे परमेश्वर का भजन गाओ।
8 : वह आकाश को मेघों से छा देता है, और पृथ्वी के लिये मेंह की तैयारी करता है, और पहाड़ों पर घास उगाता है।
9 : वह पशुओं को और कौवे के बच्चों को जो पुकारते हैं, आहार देता है।
10 : न तो वह घोड़े के बल को चाहता है, और न पुरुष के पैरों से प्रसन्न होता है;
11 : यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात् उन से जो उसकी करुणा की आशा लगाए रहते हैं।
12 : हे यरूशलेम, यहोवा की प्रशंसा कर! हे सिय्योन, अपने परमेश्वर की स्तुति कर!
13 : क्योंकि उसने तेरे फाटकों के खम्भों को दृढ़ किया है, और तेरे लड़कों को आशीष दी है।
14 : वह तेरी सीमा में शान्ति देता है, और तुझ को उत्तम से उत्तम गेहूँ से तृप्त करता है।
15 : वह पृथ्वी पर अपनी आज्ञा का प्रचार करता है, उसका वचन अति वेग से दौड़ता है।
16 : वह ऊन के समान हिम को गिराता है, और राख के समान पाला बिखेरता है।
17 : वह बर्फ के टुकड़े गिराता है, उसकी की हुई ठण्ड को कौन सह सकता है?
18 : वह आज्ञा देकर उन्हें गलाता है; वह वायु बहाता है, तब जल बहने लगता है।
19 : वह याकूब को अपना वचन, और इस्राएल को अपनी विधियाँ और नियम बताता है।
20 : किसी और जाति से उस ने ऐसा बर्ताव नहीं किया; और उसके नियमों को औरों ने नहीं जाना। याह की स्तुति करो!