पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 118
1 : यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!
2 : इस्राएल कहे, उसकी करुणा सदा की है।
3 : हारून का घराना कहे, उसकी करुणा सदा की है।
4 : यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करुणा सदा की है।
5 : मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुनकर, मुझे चौड़े स्थान में पहुँचाया।
6 : यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?
7 : यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूँगा।
8 : यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है।
9 : यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है।
10 : सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा!
11 : उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा!
12 : उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु काँटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा!
13 : तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पड़ूँ, परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की।
14 : परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है।
15 : धर्मियों के तम्बुओं में जयजयकार और उद्धार की ध्वनि हो रही है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है,
16 : यहोवा का दाहिना हाथ महान् हुआ है, यहोवा के दाहिने हाथ से पराक्रम का काम होता है!
17 : मैं न मरूँगा वरन् जीवित रहूँगा, और परमेश्वर के कामों का वर्णन करता रहूँगा।
18 : परमेश्वर ने मेरी बड़ी ताड़ना तो की है, परन्तु मुझे मृत्यु के वश में नहीं किया।
19 : मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूँगा।
20 : यहोवा का द्वार यही है, इससे धर्मी प्रवेश करने पाएँगे।
21 : हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है, और मेरा उद्धार ठहर गया है।
22 : राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है।
23 : यह तो यहोवा की ओर से हुआ है, यह हमारी दृष्टि में अद्भुत है।
24 : आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है; हम इसमें मगन और आनन्दित हों।
25 : हे यहोवा, विनती सुन, उद्धार कर! हे यहोवा, विनती सुन, सफलता दे!
26 : धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है! हम ने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है।
27 : यहोवा परमेश्वर है, और उसने हम को प्रकाश दिया है। यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों से बाँधो!
28 : हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा; तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझ को सराहूँगा।
29 : यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा बनी रहेगी!