P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 115
1 : हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन् अपने ही नाम की महिमा, अपनी करुणा और सच्चाई के निमित्त कर।
2 : जाति जाति के लोग क्यों कहने पाएँ, “उनका परमेश्वर कहाँ रहा?”
3 : हमारा परमेश्वर तो स्वर्ग में है; उसने जो चाहा वही किया है।
4 : उन लोगों की मूरतें सोने चाँदी ही की तो हैं, वे मनुष्यों के हाथ की बनाई हुई हैं।
5 : उनके मुँह तो रहता है, परन्तु वे बोल नहीं सकतीं; उनके आँखें तो रहती हैं, परन्तु वे देख नहीं सकतीं।
6 : उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं; उनके नाक तो रहती है, परन्तु वे सूंघ नहीं सकतीं,
7 : उनके हाथ तो रहते हैं; परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकतीं; उनके पाँव तो रहते हैं, परन्तु वे चल नहीं सकतीं; और अपने कण्ठ से कुछ भी शब्द नहीं निकाल सकतीं।
8 : जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनानेवाले हैं; और उन पर सब भरोसा रखनेवाले भी वैसे ही हो जाएँगे।
9 : हे इस्राएल, यहोवा पर भरोसा रख! तेरा सहायक और ढाल वही है।
10 : हे हारून के घराने, यहोवा पर भरोसा रख! तेरा* सहायक और ढाल वही है।
11 : हे यहोवा के डरवैयो, यहोवा पर भरोसा रखो! तुम्हारा* सहायक और ढाल वही है।
12 : यहोवा ने हम को स्मरण किया है; वह आशीष देगा; वह इस्राएल के घराने को आशीष देगा; वह हारून के घराने को आशीष देगा।
13 : क्या छोटे क्या बड़े जितने यहोवा के डरवैये हैं, वह उन्हें आशीष देगा।
14 : यहोवा तुम को और तुम्हारे लड़कों को भी अधिक बढ़ाता जाए!
15 : यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, उसकी ओर से तुम आशीष पाए हो।
16 : स्वर्ग तो यहोवा का है, परन्तु पृथ्वी उसने मनुष्यों को दी है।
17 : मृतक जितने चुपचाप पड़े हैं, वे तो याह की स्तुति नहीं कर सकते,
18 : परन्तु हम लोग याह को अब से लेकर सर्वदा तक धन्य कहते रहेंगे। याह की स्तुति करो!