வேதாகமம்
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 85
1 : हे यहोवा, तू अपने देश पर प्रसन्न हुआ, याकूब को बँधुआई से लौटा ले आया है।
2 : तू ने अपनी प्रजा के अधर्म को क्षमा किया है; और उसके सब पापों को ढाँप दिया है। (सेला)
3 : तू ने अपने रोष को शान्त किया है; और अपने भड़के हुए कोप को दूर किया है।
4 : हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हम को पुन: स्थापित कर, और अपना क्रोध हम पर से दूर कर!
5 : क्या तू हम पर सदा कोपित रहेगा? क्या तू पीढ़ी से पीढ़ी तक कोप करता रहेगा?
6 : क्या तू हम को फिर न जिलाएगा, कि तेरी प्रजा तुझ में आनन्द करे?
7 : हे यहोवा, अपनी करुणा हमें दिखा, और तू हमारा उद्धार कर।
8 : मैं कान लगाए रहूँगा कि परमेश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से जो उसके भक्त हैं, शान्ति की बातें कहेगा; परन्तु वे फिरके मूर्खता न करने लगें।
9 : निश्चय उसके डरवैयों के उद्धार का समय निकट है, तब हमारे देश में महिमा का निवास होगा।
10 : करुणा और सच्चाई आपस में मिल गई हैं; धर्म और मेल ने आपस में चुम्बन किया है।
11 : पृथ्वी में से सच्चाई उगती और स्वर्ग से धर्म झुकता है।
12 : फिर यहोवा उत्तम पदार्थ देगा, और हमारी भूमि अपनी उपज देगी।
13 : धर्म उसके आगे आगे चलेगा, और उसके पद–चिह्नों को हमारे लिये मार्ग बनाएगा।