पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 68
1 : परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तितर–बितर हों; और उसके बैरी उसके सामने से भाग जाएँ!
2 : जैसे धूआँ उड़ जाता है, वैसे ही तू उनको उड़ा दे; जैसे मोम आग की आँच से पिघल जाता है, वैसे ही दुष्ट लोग परमेश्वर की उपस्थिति से नष्ट हों।
3 : परन्तु धर्मी आनन्दित हों, वे परमेश्वर के सामने प्रफुल्लित हों; वे आनन्द में मगन हों!
4 : परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; जो निर्जल देशों में सवार होकर चलता है, उसके लिये सड़क बनाओ; उसका नाम याह है, इसलिये तुम उसके सामने प्रफुल्लित हो!
5 : परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है।
6 : परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बन्दियों को छुड़ाकर सम्पन्न करता है; परन्तु हठीलों को सूखी भूमि पर रहना पड़ता है।
7 : हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चलता था, जब तू निर्जल भूमि में सेना समेत चला, (सेला)
8 : तब पृथ्वी काँप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के सामने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हाँ इस्राएल के परमेश्वर के सामने काँप उठा।
9 : हे परमेश्वर, तू ने बहुतायत की वर्षा की; तेरा निज भाग बहुत सूखा था, परन्तु तूने उसको हरा–भरा किया है;
10 : तेरा झुण्ड उस में बसने लगा; हे परमेश्वर, तू ने अपनी भलाई से दीन जन के लिये तैयारी की है।
11 : प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनानेवालियों की बड़ी सेना हो जाती है।
12 : अपनी अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, और गृहस्थिन लूट को बाँट लेती है।
13 : क्या तुम भेड़शाला के बीच लेट जाओगे, और ऐसी कबूतरी के समान होगे जिसके पंख चाँदी से और जिसके पर पीले सोने से मढ़े हुए हों?
14 : जब सर्वशक्तिमान ने उसमें राजाओं को तितर बितर किया, तब मानो सल्मोन पर्वत पर हिम पड़ा।
15 : बाशान का पहाड़ परमेश्वर का पहाड़ है; बाशान का पहाड़ बहुत शिखरवाला पहाड़ है।
16 : परन्तु हे शिखरवाले पहाड़ो, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहाँ यहोवा सदा वास किए रहेगा?
17 : परमेश्वर के रथ बीस हज़ार, वरन् हज़ारों हज़ार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे सीनै पवित्रस्थान में है।
18 : तू ऊँचे पर चढ़ा, तू लोगों को बँधुआई में ले गया; तू ने मनुष्यों से, वरन् हठीले मनुष्यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्वर उनमें वास करे।
19 : धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता परमेश्वर है। (सेला)
20 : वही हमारे लिये बचानेवाला परमेश्वर ठहरा; यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है।
21 : निश्चय परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर पर, और जो अधर्म के मार्ग पर चलता रहता है, उसकी बाल भरी खोपड़ी पर मार मार के उसे चूर करेगा।
22 : प्रभु ने कहा है, “मैं उन्हें बाशान से निकाल लाऊँगा; मैं उनको गहिरे सागर के तल से भी फेर ले आऊँगा,
23 : कि तू अपने पाँव को लहू में डुबोए, और तेरे शत्रु तेरे कुत्तों का भाग ठहरें।”
24 : हे परमेश्वर, तेरी गति देखी गई, मेरे ईश्वर, मेरे राजा की गति पवित्रस्थान में दिखाई दी है;
25 : गानेवाले आगे आगे और तारवाले बाजों के बजानेवाले पीछे पीछे गए, चारों ओर कुमारियाँ डफ बजाती थीं।
26 : सभाओं में परमेश्वर का, हे इस्राएल के सोते से निकले हुए लोगो, प्रभु का धन्यवाद करो।
27 : वहाँ उनका अध्यक्ष छोटा बिन्यामीन है, वहाँ यहूदा के हाकिम अपने अनुचरों समेत हैं, वहाँ जबूलून और नप्ताली के भी हाकिम हैं।
28 : तेरे परमेश्वर ने आज्ञा दी कि तुझे सामर्थ्य मिले; हे परमेश्वर, जो कुछ तू ने हमारे लिये किया है, उसे दृढ़ कर।
29 : तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में है, राजा तेरे लिये भेंट ले आएँगे।
30 : नरकटों में रहनेवाले बनैले पशुओं को, साँड़ों के झुण्ड को, और देश देश के बछड़ों को झिड़क दे। वे चाँदी के टुकड़े लिए हुए प्रणाम करेंगे; जो लोग युद्ध से प्रसन्न रहते हैं, उनको उसने तितर बितर किया है।
31 : मिस्र से अधिकारी आएँगे; कूशी अपने हाथों को परमेश्वर की ओर फुर्ती से फैलाएँगे।
32 : हे पृथ्वी पर के राज्य राज्य के लोगो, परमेश्वर का गीत गाओ; प्रभु का भजन गाओ, (सेला)
33 : जो सबसे ऊँचे सनातन स्वर्ग में सवार होकर चलता है; देखो वह अपनी वाणी सुनाता है, वह गम्भीर वाणी शक्तिशाली है।
34 : परमेश्वर के सामर्थ्य की स्तुति करो, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्डल में है।
35 : हे परमेश्वर, तू अपने पवित्रस्थानों में भययोग्य है, इस्राएल का परमेश्वर ही अपनी प्रजा को सामर्थ्य और शक्ति का देनेवाला है। परमेश्वर धन्य है।