P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 41
1 : क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।
2 : यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
3 : जब वह व्याधि के मारे शय्या पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा।
4 : मैं ने कहा, “हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर; मुझ को चंगा कर, क्योंकि मैं ने तेरे विरुद्ध पाप किया है!”
5 : मेरे शत्रु यह कहकर मेरी बुराई करते हैं : “वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा।”
6 : जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है; और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।
7 : मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरुद्ध कानाफूसी करते हैं; वे मेरे ही विरुद्ध होकर मेरी हानि की कल्पना करते हैं।
8 : वे कहते हैं, “इसे तो कोई बुरा रोग लग गया है; अब जो यह पड़ा है, तो फिर कभी उठने का नहीं।”
9 : मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उसने भी मेरे विरुद्ध लात उठाई है।
10 : परन्तु हे यहोवा, तू मुझ पर अनुग्रह करके मुझ को उठा, कि मैं उनको बदला दूँ।
11 : मेरा शत्रु जो मुझ पर जयवन्त नहीं हो पाता, इससे मैं ने जान लिया है कि तू मुझ से प्रसन्न है।
12 : मुझे तो तू खराई में सम्भालता, और सर्वदा के लिये अपने सम्मुख स्थिर करता है।
13 : इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है आमीन, फिर आमीन।