வேதாகமம்
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 16
1 : हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूँ।
2 : मैं ने परमेश्वर से कहा, “तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।”
3 : पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूँ।
4 : जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लहूवाले अर्घ नहीं चढ़ाऊँगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूँगा।
5 : यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे भाग को तू स्थिर रखता है।
6 : मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
7 : मैं यहोवा को धन्य कहता हूँ, क्योंकि उसने मुझे सम्मति दी है; वरन् मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।
8 : मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊँगा।
9 : इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।
10 : क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
11 : तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।