P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 10
1 : हे यहोवा, तू क्यों दूर खड़ा रहता है? संकट के समय में क्यों छिपा रहता है?
2 : दुष्टों के अहंकार के कारण दीन मनुष्य खदेड़े जाते हैं; वे अपनी ही निकाली हुई युक्तियों में फँस जाएँ।
3 : क्योंकि दुष्ट अपनी अभिलाषा पर घमण्ड करता है, और लोभी परमेश्वर को त्याग देता है और उसका तिरस्कार करता है।
4 : दुष्ट अपने अभिमान के कारण कहता है कि वह लेखा नहीं लेने का; उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं।
5 : वह अपने मार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है; तेरे न्याय के विचार ऐसे ऊँचे पर होते हैं, कि उसकी दृष्टि वहाँ तक नहीं पहुँचती; जितने उसके विरोधी हैं उन पर वह फुँकारता है।
6 : वह अपने मन में कहता है, “मैं कभी टलने का नहीं : मैं पीढ़ी से पीढ़ी तक दु:ख से बचा रहूँगा।”
7 : उसका मुँह शाप और छल और अन्धेर से भरा है; उत्पात और अनर्थ की बातें उसके मुँह में हैं।
8 : वह गाँवों में घात लगाकर बैठा करता है, और गुप्त स्थानों में निर्दोष को घात करता है, उसकी आँखें लाचार की घात में लगी रहती हैं।
9 : जैसा सिंह अपनी झाड़ी में वैसा ही वह भी छिपकर घात में बैठा करता है; वह दीन को पकड़ने के लिये घात लगाए रहता है, वह दीन को अपने जाल में फँसाकर घसीट लाता है, तब उसे पकड़ लेता है।
10 : वह झुक जाता है और वह दुबक कर बैठता है; और लाचार लोग उसके महाबली हाथों से पटके जाते हैं।
11 : वह अपने मन में सोचता है, “ईश्वर भूल गया, वह अपना मुँह छिपाता है; वह कभी नहीं देखेगा।”
12 : उठ, हे यहोवा; हे ईश्वर, अपना हाथ बढ़ा; और दीनों को न भूल।
13 : परमेश्वर को दुष्ट क्यों तुच्छ जानता है, और अपने मन में कहता है, “तू लेखा न लेगा?”
14 : तू ने देख लिया है, क्योंकि तू उत्पात और उत्पीड़न पर दृष्टि रखता है, ताकि उसका पलटा अपने हाथ में रखे; लाचार अपने को तेरे हाथ में सौंपता है; अनाथों का तू ही सहायक रहा है।
15 : दुष्ट की भुजा को तोड़ डाल; और दुर्जन की दुष्टता को ढूँढ़ ढूँढ़ कर निकाल जब तक कि सब उसमें से दूर न हो जाए।
16 : यहोवा अनन्तकाल के लिये महाराजा है; उसके देश में से जाति जाति के लोग नष्ट हो गए हैं।
17 : हे यहोवा, तू ने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है; तू उनका मन तैयार करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा
18 : कि अनाथ और पिसे हुए का न्याय करे, ताकि मनुष्य जो मिट्टी से बना है फिर भय दिखाने न पाए।