P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
गिनती
अध्याय 32
- Verse 1: रूबेनियों और गादियों के पास बहुत से जानवर थे। जब उन्होंने याजेर और गिलाद देशों को देखकर विचार किया, कि वह पशुओं के योग्य देश है,
- Verse 2: तब मूसा और एलीआज़ार याजक और मण्डली के प्रधानों के पास जाकर कहने लगे,
- Verse 3: “अतारोत, दीबोन, याजेर, निम्रा, हेशबोन, एलाले, सबाम, नबो, और बोन नगरों का देश
- Verse 4: जिस पर यहोवा ने इस्राएल की मण्डली को विजय दिलवाई है, वह पशुओं के योग्य है; और तेरे दासों के पास पशु हैं।”
- Verse 5: फिर उन्होंने कहा, “यदि तेरा अनुग्रह तेरे दासों पर हो, तो यह देश तेरे दासों को मिले कि उनकी निज भूमि हो; हमें यरदन पार न ले चल।”
- Verse 6: मूसा ने गादियों और रूबेनियों से कहा, “जब तुम्हारे भाई युद्ध करने को जाएँगे तब क्या तुम यहाँ बैठे रहोगे?
- Verse 7: और इस्राएलियों से भी उस पार के देश जाने के विषय, जो यहोवा ने उन्हें दिया है, तुम क्यों अस्वीकार करवाते हो?
- Verse 8: जब मैं ने तुम्हारे बापदादों को कादेशबर्ने से कनान देश देखने के लिये भेजा, तब उन्होंने भी ऐसा ही किया था।
- Verse 9: अर्थात् जब उन्होंने एशकोल नामक घाटी तक पहुँचकर देश को देखा, तब इस्राएलियों से उस देश के विषय जो यहोवा ने उन्हें दिया था अस्वीकार करा दिया।
- Verse 10: इसलिये उस समय यहोवा ने कोप करके यह शपथ खाई,
- Verse 11: ‘नि:सन्देह जो मनुष्य मिस्र से निकल आए हैं उनमें से, जितने बीस वर्ष के या उससे अधिक आयु के हैं, वे उस देश को देखने न पाएँगे, जिसके देने की शपथ मैं ने अब्राहम, इसहाक, और याक़ूब से खाई है, क्योंकि वे मेरे पीछे पूरी रीति से नहीं हो लिये;
- Verse 12: परन्तु यपुन्ने कनजी का पुत्र कालेब, और नून का पुत्र यहोशू, ये दोनों जो मेरे पीछे पूरी रीति से हो लिये हैं ये उसे देखने पाएँगे।’
- Verse 13: अत: यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़का, और जब तक उस पीढ़ी के सब लोगों का अन्त न हुआ, जिन्होंने यहोवा के प्रति बुरा किया था, तब तक अर्थात् चालीस वर्ष तक वह उन्हें जंगल में मारे मारे फिराता रहा।
- Verse 14: और सुनो, तुम लोग उन पापियों के बच्चे होकर इसी लिये अपने बाप–दादों के स्थान पर प्रकट हुए हो, कि इस्राएल के विरुद्ध यहोवा के भड़के हुए कोप को और भी भड़काओ!
- Verse 15: यदि तुम उसके पीछे चलने से फिर जाओ, तो वह फिर हम सभों को जंगल में छोड़ देगा; इस प्रकार तुम इन सारे लोगों का नाश कराओगे।”
- Verse 16: तब उन्होंने मूसा के और निकट आकर कहा, “हम अपने पशुओं के लिये यहीं भेड़शाला बनाएँगे, और अपने बाल–बच्चों के लिये यहीं नगर बसाएँगे,
- Verse 17: परन्तु स्वयं इस्राएलियों के आगे आगे हथियार–बन्द तब तक चलेंगे, जब तक उनको उनके स्थान में न पहुँचा दें; परन्तु हमारे बाल–बच्चे इस देश के निवासियों के डर से गढ़वाले नगरों में रहेंगे।
- Verse 18: परन्तु जब तक इस्राएली अपने अपने भाग के अधिकारी न हों तब तक हम अपने घरों को न लौटेंगे।
- Verse 19: हम उनके साथ यरदन पार या कहीं आगे अपना भाग न लेंगे, क्योंकि हमारा भाग यरदन के इसी पार पूरब की ओर मिला है।”
- Verse 20: तब मूसा ने उनसे कहा, “यदि तुम ऐसा करो, अर्थात् यदि तुम यहोवा के आगे आगे युद्ध करने को हथियार बाँधो,
- Verse 21: और हर एक हथियार–बन्द यरदन के पार तब तक चले, जब तक यहोवा अपने आगे से अपने शत्रुओं को न निकाले
- Verse 22: और देश यहोवा के वश में न आए; तो उसके पीछे तुम यहाँ लौटोगे, और यहोवा के और इस्राएल के विषय निर्दोष ठहरोगे; और यह देश यहोवा के प्रति तुम्हारी निज भूमि ठहरेगा।
- Verse 23: और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा।
- Verse 24: तुम अपने बाल–बच्चों के लिये नगर बसाओ, और अपनी भेड़–बकरियों के लिये भेड़शाला बनाओ; और जो तुम्हारे मुँह से निकला है वही करो।”
- Verse 25: तब गादियों और रूबेनियों ने मूसा से कहा, “अपने प्रभु की आज्ञा के अनुसार तेरे दास करेंगे।
- Verse 26: हमारे बाल–बच्चे, स्त्रियाँ, भेड़–बकरी आदि, सब पशु तो यहीं गिलाद के नगरों में रहेंगे;
- Verse 27: परन्तु अपने प्रभु के कहे के अनुसार तेरे दास सब के सब युद्ध के लिये हथियार–बन्द यहोवा के आगे आगे लड़ने को पार जाएँगे।”
- Verse 28: तब मूसा ने उनके विषय में एलीआज़ार याजक, और नून के पुत्र यहोशू, और इस्राएलियों के गोत्रों के पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुषों को यह आज्ञा दी,
- Verse 29: “यदि सब गादी और रूबेनी पुरुष युद्ध के लिये हथियार–बन्द तुम्हारे संग यरदन पार जाएँ, और देश तुम्हारे वश में आ जाए, तो गिलाद देश उनकी निज भूमि होने को उन्हें देना।
- Verse 30: परन्तु यदि वे तुम्हारे संग हथियार–बन्द पार न जाएँ, तो उनकी निज भूमि तुम्हारे बीच कनान देश में ठहरे।”
- Verse 31: तब गादी और रूबेनी बोल उठे, “यहोवा ने जैसा तेरे दासों से कहलाया है वैसा ही हम करेंगे।
- Verse 32: हम हथियार–बन्द यहोवा के आगे आगे उस पार कनान देश में जाएँगे, परन्तु हमारी निज भूमि यरदन के इसी पार रहे।”
- Verse 33: तब मूसा ने गादियों और रूबेनियों को, और यूसुफ के पुत्र मनश्शे के आधे गोत्रियों को एमोरियों के राजा सीहोन और बाशान के राजा ओग, दोनों के राज्यों का देश, नगरों, और उनके आसपास की भूमि समेत दे दिया।
- Verse 34: तब गादियों ने दीबोन, अतारोत, अरोएर,
- Verse 35: अत्रौत, शोपान, याजेर, योगबहा,
- Verse 36: बेतनिम्रा, और बेथारान नामक नगरों को दृढ़ किया, और उनमें भेड़–बकरियों के लिये भेड़शाला बनाए।
- Verse 37: और रूबेनियों ने हेशबोन, एलाले, और किर्यातैम को,
- Verse 38: फिर नबो और बालमोन के नाम बदलकर उनको, और सिबमा को दृढ़ किया; और उन्होंने अपने दृढ़ किए हुए नगरों के और और नाम रखे।
- Verse 39: और मनश्शे के पुत्र माकीर के वंशवालों ने गिलाद देश में जाकर उसे ले लिया, और जो एमोरी उसमें रहते थे उनको निकाल दिया।
- Verse 40: तब मूसा ने मनश्शे के पुत्र माकीर के वंश को गिलाद दे दिया, और वे उसमें रहने लगे।
- Verse 41: और मनश्शेई याईर ने जाकर गिलाद की कितनी बस्तियाँ ले लीं, और उनके नाम हव्वोत्याईर रखे।
- Verse 42: और नोबह ने जाकर गाँवों समेत कनात को ले लिया, और उसका नाम अपने नाम पर नोबह रखा।