ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
2 इतिहास
अध्याय 19
- Verse 1: यहूदा का राजा यहोशापात यरूशलेम को अपने भवन में कुशल से लौट गया।
- Verse 2: तब हनानी नामक दर्शी का पुत्र येहू यहोशापात राजा से भेंट करने को निकला और उससे कहने लगा, “क्या दुष्टों की सहायता करनी और यहोवा के बैरियों से प्रेम रखना चाहिये? इस काम के कारण यहोवा की ओर से तुझ पर क्रोध भड़का है।
- Verse 3: तौभी तुझ में कुछ अच्छी बातें पाई जाती हैं। तू ने तो देश में से अशेरों को नष्ट किया और अपने मन को परमेश्वर की खोज में लगाया है।”
- Verse 4: यहोशापात यरूशलेम में रहता था, और उसने बेर्शेबा से लेकर एप्रैम के पहाड़ी देश तक अपनी प्रजा में फिर दौरा करके, उनको उनके पितरों के परमेश्वर यहोवा की ओर फेर दिया।
- Verse 5: फिर उसने यहूदा के एक एक गढ़वाले नगर में न्यायी ठहराया,
- Verse 6: और उसने न्यायियों से कहा, “सोचो कि क्या करते हो, क्योंकि तुम जो न्याय करोगे, वह मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा के लिये करोगे; और वह न्याय करते समय तुम्हारे साथ रहेगा।
- Verse 7: अब यहोवा का भय तुम में बना रहे; चौकसी से काम करना, क्योंकि हमारे परमेश्वर यहोवा में कुछ भी कुटिलता नहीं है, और न वह किसी का पक्ष करता और न घूस लेता है।”
- Verse 8: यरूशलेम में भी यहोशापात ने लेवियों और याजकों और इस्राएल के पितरों के घरानों के कुछ मुख्य पुरुषों को यहोवा की ओर से न्याय करने और मुक़द्दमों को जाँचने के लिये ठहराया। उनका न्याय–आसन यरूशलेम में था।
- Verse 9: उसने उनको आज्ञा दी, “यहोवा का भय मानकर, सच्चाई और निष्कपट मन से ऐसा करना।
- Verse 10: तुम्हारे भाई जो अपने अपने नगर में रहते हैं, उनमें से जिसका कोई मुक़द्दमा तुम्हारे सामने आए, चाहे वह खून का हो, चाहे व्यवस्था, अथवा किसी आज्ञा या विधि या नियम के विषय हो, उनको चिता देना कि यहोवा के विषय दोषी न हो। ऐसा न हो कि तुम पर और तुम्हारे भाइयों पर उसका क्रोध भड़के। ऐसा करो तो तुम दोषी न ठहरोगे।
- Verse 11: और देखो, यहोवा के विषय के सब मुक़द्दमों में तो अमर्याह महायाजक, और राजा के विषय के सब मुक़द्दमों में यहूदा के घराने का प्रधान इश्माएल का पुत्र जबद्याह तुम्हारे ऊपर अधिकारी है; और लेवीय तुम्हारे सामने सरदारों का काम करेंगे। इसलिये हियाव बाँधकर काम करो और भले मनुष्य के साथ यहोवा रहेगा।”