पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
1 राजाओं
अध्याय 9
- Verse 1: जब सुलैमान यहोवा के भवन और राजभवन को बना चुका, और जो कुछ उसने करना चाहा था, उसे कर चुका,
- Verse 2: तब यहोवा ने जैसे गिबोन में उसको दर्शन दिया था, वैसे ही दूसरी बार भी उसे दर्शन दिया।
- Verse 3: यहोवा ने उससे कहा, “जो प्रार्थना गिड़गिड़ाहट के साथ तू ने मुझ से की है, उसको मैं ने सुना है, यह जो भवन तू ने बनाया है, उसमें मैं ने अपना नाम सदा के लिये रखकर उसे पवित्र किया है; और मेरी आँखें और मेरा मन नित्य वहीं लगे रहेंगे।
- Verse 4: और यदि तू अपने पिता दाऊद के समान मन की खराई और सिधाई से अपने को मेरे सामने जानकर चलता रहे, और मेरी सब आज्ञाओं के अनुसार किया करे, और मेरी विधियों और नियमों को मानता रहे, तो मैं तेरा राज्य इस्राएल के ऊपर सदा के लिये स्थिर करूँगा;
- Verse 5: जैसे कि मैं ने तेरे पिता दाऊद को वचन दिया था, ‘तेरे कुल में इस्राएल की गद्दी पर विराजनेवाले सदा बने रहेंगे।’
- Verse 6: परन्तु यदि तुम लोग या तुम्हारे वंश के लोग मेरे पीछे चलना छोड़ दें; और मेरी उन आज्ञाओं और विधियों को जो मैं ने तुम को दी हैं, न मानें, और जाकर पराये देवताओं की उपासना करें और उन्हें दण्डवत् करने लगें,
- Verse 7: तो मैं इस्राएल को इस देश में से जो मैं ने उनको दिया है, काट डालूँगा और इस भवन को जो मैं ने अपने नाम के लिये पवित्र किया है, अपनी दृष्टि से उतार दूँगा; और सब देशों के लोगों में इस्राएल की उपमा दी जायेगी और उसका दृष्टान्त चलेगा।
- Verse 8: और यह भवन जो ऊँचे पर रहेगा, तो जो कोई इसके पास होकर चलेगा, वह चकित होगा, और ताली बजाएगा और वे पूछेंगे, ‘यहोवा ने इस देश और इस भवन के साथ क्यों ऐसा किया है;’
- Verse 9: तब लोग कहेंगे, ‘उन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा को जो उनके पुरखाओं को मिस्र देश से निकाल लाया था, तजकर पराये देवताओं को पकड़ लिया, और उनको दण्डवत् की और उनकी उपासना की, इस कारण यहोवा ने यह सब विपत्ति उन पर डाल दी’।”
- Verse 10: सुलैमान को यहोवा के भवन और राजभवन दोनों के बनाने में बीस वर्ष लग गए।
- Verse 11: तब सुलैमान ने सोर के राजा हीराम को जिसने उसके मनमाने देवदारु और सनोवर की लकड़ी और सोना दिया था, गलील देश के बीस नगर दिए।
- Verse 12: जब हीराम ने सोर से जाकर उन नगरों को देखा, जो सुलैमान ने उसको दिए थे, तब वे उसको अच्छे न लगे।
- Verse 13: तब उसने कहा, “हे मेरे भाई, ये कैसे नगर तू ने मुझे दिए हैं?” और उसने उनका नाम कबूल देश रखा। और यही नाम आज के दिन तक पड़ा है।
- Verse 14: फिर हीराम ने राजा के पास एक सौ बीस किक्कार सोना भेजा था।
- Verse 15: राजा सुलैमान ने लोगों को जो बेगारी में रखा, इसका प्रयोजन यह था, कि यहोवा का और अपना भवन बनाए, और मिल्लो और यरूशलेम की शहरपनाह और हासोर, मगिद्दो और गेजेर नगरों को दृढ़ करे।
- Verse 16: गेजेर पर मिस्र के राजा फ़िरौन ने चढ़ाई करके उसे ले लिया था और आग लगाकर फूँक दिया और उस नगर में रहनेवाले कनानियों को मार डाला, और उसे अपनी बेटी सुलैमान की रानी का निज भाग करके दिया था;
- Verse 17: अत: सुलैमान ने गेजेर और नीचेवाले बथोरेन,
- Verse 18: बालात और तामार को जो जंगल में हैं, दृढ़ किया, ये तो देश में हैं।
- Verse 19: फिर सुलैमान के जितने भण्डार वाले नगर थे, और उसके रथों और सवारों के नगर, उनको वरन् जो कुछ सुलैमान ने यरूशलेम, लबानोन और अपने राज्य के सब देशों में बनाना चाहा, उन सब को उसने दृढ़ किया।
- Verse 20: एमोरी, हित्ती, परिज्जी, हिब्बी और यबूसी जो रह गए थे, जो इस्राएलियों में के न थे,
- Verse 21: उनके वंश जो उनके बाद देश में रह गए, और उनको इस्राएली नष्ट न कर सके, उनको तो सुलैमान ने दास करके बेगारी में रखा, और आज तक उनकी वही दशा है।
- Verse 22: परन्तु इस्राएलियों में से सुलैमान ने किसी को दास न बनाया; वे तो योद्धा और उसके कर्मचारी, उसके हाकिम, उसके सरदार, और उसके रथों, और सवारों के प्रधान हुए।
- Verse 23: जो मुख्य हाकिम सुलैमान के कामों के ऊपर ठहर के काम करनेवालों पर प्रभुता करते थे, ये पाँच सौ पचास थे।
- Verse 24: जब फ़िरौन की बेटी दाऊदपुर से अपने उस भवन को आ गई, जो सुलैमान ने उसके लिये बनाया था, तब उसने मिल्लो को बनाया।
- Verse 25: सुलैमान उस वेदी पर जो उसने यहोवा के लिये बनाई थी, प्रति वर्ष तीन बार होमबलि और मेलबलि चढ़ाया करता था, और साथ ही उस वेदी पर जो यहोवा के सम्मुख थी धूप जलाया करता था। इस प्रकार उसने उस भवन को तैयार कर दिया।
- Verse 26: फिर राजा सुलैमान ने एस्योनगेबेर में जो एदोम देश में लाल समुद्र के किनारे एलोत के पास है, जहाज बनाए।
- Verse 27: और जहाजों में हीराम ने अपने अधिकार के मल्लाहों को, जो समुद्र की जानकारी रखते थे, सुलैमान के सेवकों के संग भेज दिया।
- Verse 28: उन्होंने ओपीर को जाकर वहाँ से चार सौ बीस किक्कार सोना, राजा सुलैमान को लाकर दिया।