पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 77
- Verse 1: मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूँगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूँगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।
- Verse 2: संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शान्ति आई ही नहीं।
- Verse 3: मैं परमेश्वर का स्मरण कर करके कराहता हूँ; मैं चिन्ता करते करते मूर्च्छित हो चला हूँ। (सेला)
- Verse 4: तू मुझे झपकी लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूँ कि मेरे मुँह से बात नहीं निकलती।
- Verse 5: मैं ने प्राचीनकाल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।
- Verse 6: मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूँ, और मन में भली भाँति विचार करता हूँ :
- Verse 7: “क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा?
- Verse 8: क्या उसकी करुणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?
- Verse 9: क्या परमेश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध करके अपनी सब दया को रोक रखा है?” (सेला)
- Verse 10: मैं ने कहा, “यही तो मेरा दु:ख है, कि परमप्रधान का दाहिना हाथ बदल गया है।”
- Verse 11: मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूँगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीनकालवाले अद्भुत कामों का स्मरण करूँगा।
- Verse 12: मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूँगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूँगा।
- Verse 13: हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
- Verse 14: अद्भुत काम करनेवाला परमेश्वर तू ही है, तू ने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।
- Verse 15: तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला)
- Verse 16: हे परमेश्वर, समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देखकर डर गया, गहिरा सागर भी काँप उठा।
- Verse 17: मेघों से बड़ी वर्षा हुई; आकाश से शब्द हुआ; फिर तेरे तीर इधर उधर चले।
- Verse 18: बवण्डर में तेरे गरजने का शब्द सुन पड़ा था; जगत बिजली से प्रकाशित हुआ; पृथ्वी काँपी और हिल गई।
- Verse 19: तेरा मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पाँवों के चिह्न मालूम नहीं होते।
- Verse 20: तू ने मूसा और हारून के द्वारा अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की।