पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 69
- Verse 1: हे परमेश्वर, मेरा उद्धार कर, मैं जल में डूबा जाता हूँ।
- Verse 2: मैं बड़े दलदल में धँसा जाता हूँ, और मेरे पैर कहीं नहीं रुकते; मैं गहिरे जल में आ गया, और धारा में डूबा जाता हूँ।
- Verse 3: मैं पुकारते पुकारते थक गया, मेरा गला सूख गया है; अपने परमेश्वर की बाट जोहते जोहते, मेरी आँखें धुँधली पड़ गई हैं।
- Verse 4: जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे गिनती में मेरे सिर के बालों से अधिक हैं; मेरे विनाश करनेवाले जो व्यर्थ मेरे शत्रु हैं, वे सामर्थी हैं, इसलिये जो मैं ने लूटा नहीं वह भी मुझ को देना पड़ा।
- Verse 5: हे परमेश्वर, तू तो मेरी मूढ़ता को जानता है, और मेरे दोष तुझ से छिपे नहीं हैं।
- Verse 6: हे प्रभु, हे सेनाओं के यहोवा, जो तेरी बाट जोहते हैं, उनकी आशा मेरे कारण न टूटे; हे इस्राएल के परमेश्वर, जो तुझे ढूँढ़ते हैं, उनका मुँह मेरे कारण काला न हो।
- Verse 7: तेरे ही कारण मेरी निन्दा हुई है, और मेरा मुँह लज्जा से ढँपा है।
- Verse 8: मैं अपने भाइयों के सामने अजनबी हुआ, और अपने सगे भाइयों की दृष्टि में परदेशी ठहरा हूँ।
- Verse 9: क्योंकि मैं तेरे भवन की धुन में जलते जलते भस्म हुआ। और जो निन्दा वे तेरी करते हैं, वही निन्दा मुझ को सहनी पड़ी है।
- Verse 10: जब मैं रोकर और उपवास करके दु:ख उठाता था, तब उससे भी मेरी नामधराई ही हुई।
- Verse 11: जब मैं टाट का वस्त्र पहिने था, तब मेरा दृष्टान्त उन में चलता था।
- Verse 12: फाटक के पास बैठनेवाले मेरे विषय बातचीत करते हैं, और मदिरा पीनेवाले मुझ पर लगता हुआ गीत गाते हैं।
- Verse 13: परन्तु हे यहोवा, मेरी प्रार्थना तो तेरी प्रसन्नता के समय में हो रही है; हे परमेश्वर, अपनी करुणा की बहुतायत से, और बचाने की अपनी सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार मेरी सुन ले।
- Verse 14: मुझ को दलदल में से उबार कि मैं धँस न जाऊँ; मैं अपने बैरियों से, और गहिरे जल में से बच जाऊँ।
- Verse 15: मैं धारा में डूब न जाऊँ, और न मैं गहिरे जल में डूब मरूँ, और न पाताल का मुँह मेरे ऊपर बन्द हो।
- Verse 16: हे यहोवा, मेरी सुन ले, क्योंकि तेरी करुणा उत्तम है; अपनी दया की बहुतायत के अनुसार मेरी ओर ध्यान दे।
- Verse 17: अपने दास से अपना मुँह न मोड़; क्योंकि मैं संकट में हूँ, फुर्ती से मेरी सुन ले।
- Verse 18: मेरे निकट आकर मुझे छुड़ा ले, मेरे शत्रुओं से मुझ को छुटकारा दे।
- Verse 19: मेरी नामधराई और लज्जा और अनादर को तू जानता है : मेरे सब द्रोही तेरे सामने हैं।
- Verse 20: मेरा हृदय नामधराई के कारण फट गया, और मैं बहुत उदास हूँ। मैं ने किसी तरस खानेवाले की आशा तो की, परन्तु किसी को न पाया, और शान्ति देनेवाले को ढूँढ़ता तो रहा, परन्तु कोई न मिला।
- Verse 21: लोगों ने मेरे खाने के लिये इन्द्रायन दिया, और मेरी प्यास बुझाने के लिये मुझे सिरका पिलाया।
- Verse 22: उनका भोजन उनके लिये फन्दा हो जाए; और उनके सुख के समय जाल बन जाए।
- Verse 23: उनकी आँखों पर अन्धेरा छा जाए, ताकि वे देख न सकें; और तू उनकी कटि को निरन्तर कँपाता रह।
- Verse 24: उनके ऊपर अपना रोष भड़का, और तेरे क्रोध की आँच उनको लगे।
- Verse 25: उनकी छावनी उजड़ जाए, उनके डेरों में कोई न रहे।
- Verse 26: क्योंकि जिसको तू ने मारा, वे उसके पीछे पड़े हैं, और जिनको तू ने घायल किया, वे उनकी पीड़ा की चर्चा करते हैं।
- Verse 27: उनके अधर्म पर अधर्म बढ़ा; और वे तेरे धर्म को प्राप्त न करें।
- Verse 28: उनका नाम जीवन की पुस्तक में से काटा जाए, और धर्मियों के संग लिखा न जाए।
- Verse 29: परन्तु मैं तो दु:खी और पीड़ित हूँ, इसलिये हे परमेश्वर, तू मेरा उद्धार करके मुझे ऊँचे स्थान पर बैठा।
- Verse 30: मैं गीत गाकर तेरे नाम की स्तुति करूँगा, और धन्यवाद करता हुआ तेरी बड़ाई करूँगा।
- Verse 31: यह यहोवा को बैल से अधिक, वरन् सींग और खुरवाले बैल से भी अधिक भाएगा।
- Verse 32: नम्र लोग इसे देखकर आनन्दित होंगे, हे परमेश्वर के खोजियो, तुम्हारा मन हरा हो जाए।
- Verse 33: क्योंकि यहोवा दरिद्रों की ओर कान लगाता, और अपने लोगों को जो बन्दी हैं तुच्छ नहीं जानता।
- Verse 34: स्वर्ग और पृथ्वी उसकी स्तुति करें, और समुद्र अपने सब जीव जन्तुओं समेत उसकी स्तुति करे।
- Verse 35: क्योंकि परमेश्वर सिय्योन का उद्धार करेगा, और यहूदा के नगरों को फिर बसाएगा; और लोग फिर वहाँ बसकर उसके अधिकारी हो जाएँगे।
- Verse 36: उसके दासों का वंश उसको अपने भाग में पाएगा, और उसके नाम के प्रेमी उस में वास करेंगे।