पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 10
- Verse 1: “मेरा प्राण जीवित रहने से उकताता है; मैं स्वतंत्रता पूर्वक कुड़कुड़ाऊँगा; और मैं अपने मन की कड़वाहट के मारे बातें करूँगा।
- Verse 2: मैं परमेश्वर से कहूँगा, मुझे दोषी न ठहरा; मुझे बता दे कि तू किस कारण मुझ से मुक़द्दमा लड़ता है?
- Verse 3: क्या तुझे अन्धेर करना, और दुष्टों की युक्ति को सफल करके अपने हाथों के बनाए हुए को निकम्मा जानना भला लगता है?
- Verse 4: क्या तेरी आँखें देहधारियों की सी हैं? और क्या तेरा देखना मनुष्य का सा है?
- Verse 5: क्या तेरे दिन मनुष्य के दिन के समान हैं, या तेरे वर्ष पुरुष के समयों के तुल्य हैं,
- Verse 6: कि तू मेरा अधर्म ढूँढ़ता, और मेरा पाप पूछता है?
- Verse 7: तुझे तो मालूम ही है कि मैं दुष्ट नहीं हूँ, और तेरे हाथ से कोई छुड़ानेवाला नहीं!
- Verse 8: तू ने अपने हाथों से मुझे ठीक रचा है और जोड़कर बनाया है; तौभी मुझे नष्ट किए डालता है।
- Verse 9: स्मरण कर कि तू ने मुझ को गूँधी हुई मिट्टी के समान बनाया, क्या तू मुझे फिर धूल में मिलाएगा?
- Verse 10: क्या तू ने मुझे दूध के समान उण्डेलकर, और दही के समान जमाकर नहीं बनाया?
- Verse 11: फिर तू ने मुझ पर चमड़ा और मांस चढ़ाया और हड्डियाँ और नसें गूँथकर मुझे बनाया है।
- Verse 12: तू ने मुझे जीवन दिया, और मुझ पर करुणा की है; और तेरी चौकसी से मेरे प्राण की रक्षा हुई है।
- Verse 13: तौभी तू ने ऐसी बातों को अपने मन में छिपा रखा; मैं जान गया कि तू ने ऐसा ही करने की ठान ली थी।
- Verse 14: यदि मैं पाप करूँ, तो तू उसका लेखा लेगा; और अधर्म करने पर मुझे निर्दोष न ठहराएगा।
- Verse 15: यदि मैं दुष्टता करूँ तो मुझ पर हाय! यदि मैं धर्मी बनूँ तौभी मैं सिर न उठाऊँगा, क्योंकि मैं अपमान से भरा हुआ हूँ और अपने दु:ख पर ध्यान रखता हूँ।
- Verse 16: और चाहे सिर उठाऊँ तौभी तू सिंह के समान मेरा अहेर करता है, और फिर मेरे विरुद्ध आश्चर्यकर्म करता है।
- Verse 17: तू मेरे सामने अपने नये नये साक्षी ले आता है, और मुझ पर अपना क्रोध बढ़ाता है; और मुझ पर सेना पर सेना चढ़ाई करती है।
- Verse 18: “तू ने मुझे गर्भ से क्यों निकाला? नहीं तो मैं वहीं प्राण छोड़ता, और कोई मुझे देखने भी न पाता।
- Verse 19: मेरा होना न होने के समान होता, और पेट ही से क़ब्र को पहुँचाया जाता।
- Verse 20: क्या मेरे दिन थोड़े नहीं? मुझे छोड़ दे, और मेरी ओर से मुँह फेर ले, कि मेरा मन थोड़ा शान्त हो जाए
- Verse 21: इससे पहले कि मैं वहाँ जाऊँ, जहाँ से फिर न लौटूँगा, अर्थात् अन्धियारे और घोर अन्धकार के देश में, जहाँ अन्धकार ही अन्धकार है;
- Verse 22: और मृत्यु के अन्धकार का देश जिस में सब कुछ गड़बड़ है; और जहाँ प्रकाश भी ऐसा है जैसा अन्धकार।”