పరిశుద్ధ గ్రంథము
पुराना नियम
यिर्मयाह
अध्याय 41
- Verse 1: सातवें महीने में ऐसा हुआ कि इश्माएल जो नतन्याह का पुत्र और एलीशामा का पोता और राजवंश का और राजा के प्रधान पुरुषों में से था, वह दस जन संग लेकर मिस्पा में अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास आया। वहाँ मिस्पा में उन्होंने एक संग भोजन किया।
- Verse 2: तब नतन्याह के पुत्र इश्माएल और उसके संग के दस जनों ने उठकर गदल्याह को, जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता था, और जिसे बेबीलोन के राजा ने देश का अधिकारी ठहराया था, उसे तलवार से ऐसा मारा कि वह मर गया।
- Verse 3: इश्माएल ने गदल्याह के संग जितने यहूदी मिस्पा में थे, और जो कसदी योद्धा वहाँ मिले, उन सभों को मार डाला।
- Verse 4: गदल्याह के मार डाले जाने के दूसरे दिन जब कोई इसे न जानता था,
- Verse 5: तब शकेम और शीलो और शोमरोन से अस्सी पुरुष दाढ़ी मुँड़ाए, वस्त्र फाड़े, शरीर चीरे हुए और हाथ में अन्नबलि और लोबान लिए हुए, यहोवा के भवन में जाने को आते दिखाई दिए।
- Verse 6: तब नतन्याह का पुत्र इश्माएल उनसे मिलने को मिस्पा से निकला, और रोता हुआ चला। जब वह उनसे मिला, तब कहा, “अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास चलो।”
- Verse 7: जब वे उस नगर में आए तब नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने अपने संगी जनों समेत उनको घात करके गड़हे में फेंक दिया।
- Verse 8: परन्तु उनमें से दस मनुष्य इश्माएल से कहने लगे, “हम को न मार; क्योंकि हमारे पास मैदान में रखा हुआ गेहूँ, जौ, तेल और मधु है।” इसलिये उसने उन्हें छोड़ दिया और उनके भाइयों के साथ नहीं मारा।
- Verse 9: जिस गड़हे में इश्माएल ने उन लोगों के सब शवों को जिन्हें उसने गदल्याह के साथ मारा था फेंक दिया था (यह वही गड़हा है जिसे आसा राजा ने इस्राएल के राजा बाशा के डर के मारे खुदवाया था), उसको नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने मारे हुओं से भर दिया।
- Verse 10: तब जो लोग मिस्पा में बचे हुए थे, अर्थात् राजकुमारियाँ और जितने और लोग मिस्पा में रह गए थे जिन्हें अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को सौंप दिया था, उन सभों को नतन्याह का पुत्र इश्माएल बन्दी बना कर अम्मोनियों के पास ले जाने को चला।
- Verse 11: जब कारेह के पुत्र योहानान और योद्धाओं के दलों के उन सब प्रधानों ने जो उसके संग थे, सुना कि नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने यह सब बुराई की है,
- Verse 12: तब वे सब जनों को लेकर नतन्याह के पुत्र इश्माएल से लड़ने को निकले और उसको उस बड़े जलाशय के पास पाया जो गिबोन में है।
- Verse 13: कारेह के पुत्र योहानान को, और दलों के सब प्रधानों को देखकर जो उसके संग थे, इश्माएल के साथ जो लोग थे, वे सब आनन्दित हुए।
- Verse 14: जितने लोगों को इश्माएल मिस्पा से बन्दी बना कर लिए जा रहा था, वे पलटकर कारेह के पुत्र योहानान के पास चले आए।
- Verse 15: परन्तु नतन्याह का पुत्र इश्माएल आठ पुरुष समेत योहानान के हाथ से बचकर अम्मोनियों के पास चला गया।
- Verse 16: तब प्रजा में से जितने बच गए थे, अर्थात् जिन योद्धाओं, स्त्रियों, बाल–बच्चों और खोजों को कारेह का पुत्र योहानान, अहीकाम के पुत्र गदल्याह के मिस्पा में मारे जाने के बाद नतन्याह के पुत्र इश्माएल के पास से छुड़ाकर गिबोन से वापस ले आया था, उनको वह अपने सब संगी दलों के प्रधानों समेत लेकर चल दिया।
- Verse 17: बैतलहम के निकट जो किम्हाम की सराय है, उसमें वे इसलिये टिक गए कि मिस्र में जाएँ।
- Verse 18: क्योंकि वे कसदियों से डरते थे; इसका कारण यह था कि अहीकाम का पुत्र गदल्याह जिसे बेबीलोन के राजा ने देश का अधिकारी ठहराया था, उसे नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने मार डाला था।