வேதாகமம்
पुराना नियम
व्यवस्थाविवरण
अध्याय 18
- Verse 1: “लेवीय याजकों का, वरन् सारे लेवीय गोत्रियों का, इस्राएलियों के संग कोई भाग या अंश न हो; उनका भोजन हव्य और यहोवा का दिया हुआ भाग हो।
- Verse 2: उनका अपने भाइयों के बीच कोई भाग न हो; क्योंकि अपने वचन के अनुसार यहोवा उनका निज भाग ठहरा है।
- Verse 3: और चाहे गाय–बैल चाहे भेड़–बकरी का मेलबलि हो, उसके करनेवाले लोगों की ओर से याजकों का हक यह हो, कि वे उसका कंधा और दोनों गाल और पेट याजक को दें।
- Verse 4: तू उसको अपनी पहली उपज का अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल, और अपनी भेड़ों का वह ऊन देना जो पहली बार कतरा गया हो।
- Verse 5: क्योंकि तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरे सब गोत्रियों में से उसी को चुन लिया है, कि वह और उसके वंश सदा उसके नाम से सेवा टहल करने को उपस्थित हुआ करें।
- Verse 6: “फिर यदि कोई लेवीय इस्राएल की बस्तियों में से किसी से, जहाँ वह परदेशी के समान रहता हो, अपने मन की बड़ी अभिलाषा से उस स्थान पर जाए जिसे यहोवा चुन लेगा,
- Verse 7: तो अपने सब लेवीय भाइयों के समान जो वहाँ अपने परमेश्वर यहोवा के सामने उपस्थित होंगे, वह भी उसके नाम से सेवा टहल करे।
- Verse 8: और अपने पूर्वजों के भाग के मोल को छोड़ उसको भोजन का भाग भी उनके समान मिला करे।
- Verse 9: “जब तू उस देश में पहुँचे जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है, तब वहाँ की जातियों के अनुसार घिनौना काम करना न सीखना।
- Verse 10: तुझ में कोई ऐसा न हो जो अपने बेटे या बेटी को आग में होम करके चढ़ानेवाला, या भावी कहने–वाला, या शुभ–अशुभ मुहूर्त्तों का माननेवाला, या टोन्हा, या तान्त्रिक,
- Verse 11: या बाजीगर, या ओझों से पूछनेवाला, या भूत साधनेवाला, या भूतों का जगानेवाला हो।
- Verse 12: क्योंकि जितने ऐसे ऐसे काम करते हैं वे सब यहोवा के सम्मुख घृणित हैं; और इन्हीं घृणित कामों के कारण तेरा परमेश्वर यहोवा उनको तेरे सामने से निकालने पर है।
- Verse 13: तू अपने परमेश्वर यहोवा के सम्मुख सिद्ध बना रहना।
- Verse 14: “वे जातियाँ जिनका अधिकारी तू होने पर है शुभ–अशुभ मुहूर्त्तों के माननेवालों और भावी कहनेवालों की सुना करती हैं; परन्तु तुझ को तेरे परमेश्वर यहोवा ने ऐसा करने नहीं दिया।
- Verse 15: तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे मध्य से, अर्थात् तेरे भाइयों में से मेरे समान एक नबी को उत्पन्न करेगा; तू उसी की सुनना;
- Verse 16: यह तेरी उस विनती के अनुसार होगा, जो तू ने होरेब पहाड़ के पास सभा के दिन अपने परमेश्वर यहोवा से की थी, ‘मुझे न तो अपने परमेश्वर यहोवा का शब्द फिर सुनना, और न वह बड़ी आग फिर देखनी पड़े, कहीं ऐसा न हो कि मर जाऊँ।’
- Verse 17: तब यहोवा ने मुझ से कहा, ‘वे जो कुछ कहते हैं ठीक कहते हैं।
- Verse 18: इसलिये मैं उनके लिये उनके भाइयों के बीच में से तेरे समान एक नबी को उत्पन्न करूँगा; और अपना वचन उसके मुँह में डालूँगा; और जिस जिस बात की मैं उसे आज्ञा दूँगा वही वह उनको कह सुनाएगा।
- Verse 19: और जो मनुष्य मेरे वह वचन जो वह मेरे नाम से कहेगा ग्रहण न करेगा, मैं उसका हिसाब उससे लूँगा।
- Verse 20: परन्तु जो नबी अभिमान करके मेरे नाम से कोई ऐसा वचन कहे जिसकी आज्ञा मैं ने उसे न दी हो, या पराए देवताओं के नाम से कुछ कहे, वह नबी मार डाला जाए।’
- Verse 21: और यदि तू अपने मन में कहे, ‘जो वचन यहोवा ने नहीं कहा, उसको हम किस रीति से पहचानें?’
- Verse 22: तो पहचान यह है कि जब कोई नबी यहोवा के नाम से कुछ कहे, तब यदि वह वचन न घटे और पूरा न हो जाए, तो वह वचन यहोवा का कहा हुआ नहीं; परन्तु उस नबी ने वह बात अभिमान करके कही है, तू उस से भय न खाना।