வேதாகமம்
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 17
1 : “मेरा प्राण निकलने पर है, मेरे दिन पूरे हो चुके हैं; मेरे लिये कब्र तैयार है।
2 : निश्चय जो मेरे संग हैं वे ठट्ठा करनेवाले हैं, और उनका झगड़ा रगड़ा मुझे लगातार दिखाई देता है।
3 : “ज़मानत दे, अपने और मेरे बीच में तू ही ज़ामिन हो; कौन है जो मेरे हाथ पर हाथ मारे?
4 : तू ने इनके मन को समझने से रोका है, इस कारण तू इनको प्रबल न होने देगा।
5 : जो लूट के भाग के लिये अपने मित्रों की चुगली खाता है, उसके लड़कों की आँखें अंधी हो जाएँगी।
6 : “उसने ऐसा किया कि सब लोग मेरी उपमा देते हैं; और लोग मेरे मुँह पर थूकते हैं।
7 : खेद के मारे मेरी आँखों में धुंधलापन छा गया है, और मेरे सब अंग छाया के समान हो गए हैं।
8 : इसे देखकर सीधे लोग चकित होते हैं, और जो निर्दोष हैं, वे भक्तिहीन के विरुद्ध भड़क उठते हैं।
9 : तौभी धर्मी लोग अपना मार्ग पकड़े रहेंगे, और शुद्ध काम करनेवाले सामर्थ्य पर सामर्थ्य पाते जाएँगे।
10 : तुम सब के सब मेरे पास आओ तो आओ, परन्तु मुझे तुम लोगों में एक भी बुद्धिमान न मिलेगा।
11 : मेरे दिन तो बीत चुके, और मेरी योजनाएँ मिट गईं, और जो मेरे मन में था, वह नष्ट हुआ है।
12 : वे रात को दिन ठहराते; वे कहते हैं, अन्धियारे के निकट उजियाला है।
13 : यदि मेरी आशा यह हो कि अधोलोक मेरा धाम होगा, यदि मैं ने अन्धियारे में अपना बिछौना बिछा लिया है,
14 : यदि मैं ने सड़ाहट से कहा, ‘तू मेरा पिता है,’ और कीड़े से कि, ‘तू मेरी माँ’, और ‘मेरी बहिन है,’
15 : तो मेरी आशा कहाँ रही? मेरी आशा किस के देखने में आएगी?
16 : क्या वह अधोलोक में उतर जाएगी? क्या उस समेत मुझे भी मिट्टी में विश्राम मिलेगा?”