ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
न्यायियों
अध्याय 6
- Verse 1: तब इस्राएलियों ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, इसलिये यहोवा ने उन्हें मिद्यानियों के वश में सात वर्ष कर रखा।
- Verse 2: और मिद्यानी इस्राएलियों पर प्रबल हो गए। मिद्यानियों के डर के मारे इस्राएलियों ने पहाड़ों के गहरे खड्डों, और गुफाओं, और किलों को अपने निवास बना लिये।
- Verse 3: जब जब इस्राएली बीज बोते तब तब मिद्यानी और अमालेकी और पूर्वी लोग उनके विरुद्ध चढ़ाई करके
- Verse 4: अज्जा तक छावनी डाल डालकर भूमि की उपज नष्ट कर डालते थे, और इस्राएलियों के लिये न तो कुछ भोजनवस्तु, और न भेड़–बकरी, और न गाय–बैल, और न गदहा छोड़ते थे।
- Verse 5: क्योंकि वे अपने पशुओं और डेरों को लिए हुए चढ़ाई करते, और टिड्डियों के दल के समान बहुत आते थे; और उनके ऊँट भी अनगिनत होते थे; और वे देश को उजाड़ने के लिये उसमें आया करते थे।
- Verse 6: और मिद्यानियों के कारण इस्राएली बड़ी दुर्दशा में पड़ गए; तब इस्राएलियों ने यहोवा की दोहाई दी।
- Verse 7: जब इस्राएलियों ने मिद्यानियों के कारण यहोवा की दोहाई दी,
- Verse 8: तब यहोवा ने इस्राएलियों के पास एक नबी भेजा, जिसने उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है : मैं तुम को मिस्र में से ले आया, और दासत्व के घर से निकाल ले आया;
- Verse 9: और मैं ने तुम को मिस्रियों के हाथ से, वरन् जितने तुम पर अन्धेर करते थे उन सभों के हाथ से छुड़ाया, और उनको तुम्हारे सामने से बरबस निकालकर उनका देश तुम्हें दे दिया;
- Verse 10: और मैं ने तुम से कहा, ‘मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ; एमोरी लोग जिनके देश में तुम रहते हो उनके देवताओं का भय न मानना।’ परन्तु तुम ने मेरा कहना नहीं माना।”
- Verse 11: फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूँ इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।
- Verse 12: उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, “हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।”
- Verse 13: गिदोन ने उससे कहा, “हे मेरे प्रभु, विनती सुन, यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती? और जितने आश्चर्यकर्मों का वर्णन हमारे पुरखा यह कहकर करते थे, ‘क्या यहोवा हम को मिस्र से छुड़ा नहीं लाया,’ वे कहाँ रहे? अब तो यहोवा ने हम को त्याग दिया, और मिद्यानियों के हाथ कर दिया है।”
- Verse 14: तब यहोवा ने उस पर दृष्टि करके कहा, “अपनी इसी शक्ति पर जा और तू इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ाएगा। क्या मैं ने तुझे नहीं भेजा?”
- Verse 15: उसने कहा, “हे मेरे प्रभु, विनती सुन, मैं इस्राएल को कैसे छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सबसे कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सबसे छोटा हूँ।”
- Verse 16: यहोवा ने उससे कहा, “निश्चय मैं तेरे संग रहूँगा; इसलिये तू मिद्यानियों को ऐसा मार लेगा जैसा एक मनुष्य को।”
- Verse 17: गिदोन ने उससे कहा, “यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मुझे इसका कोई चिह्न दिखा कि तू ही मुझ से बातें कर रहा है।
- Verse 18: जब तक मैं तेरे पास फिर आकर अपनी भेंट निकालकर तेरे सामने न रखूँ, तब तक तू यहाँ से न जा।” उसने कहा, “मैं तेरे लौटने तक ठहरा रहूँगा।”
- Verse 19: तब गिदोन ने जाकर बकरी का एक बच्चा और एक एपा मैदे की अखमीरी रोटियाँ तैयार कीं; तब मांस को टोकरी में, और जूस को तसले में रखकर बांजवृक्ष के तले उसके पास ले जाकर दिया।
- Verse 20: परमेश्वर के दूत ने उससे कहा, “मांस और अखमीरी रोटियों को लेकर इस चट्टान पर रख दे, और जूस को उण्डेल दे।” उसने ऐसा ही किया।
- Verse 21: तब यहोवा के दूत ने अपने हाथ की लाठी को बढ़ाकर मांस और अखमीरी रोटियों को छूआ; और चट्टान से आग निकली जिस से मांस और अखमीरी रोटियाँ भस्म हो गईं; तब यहोवा का दूत उसकी दृष्टि से ओझल हो गया।
- Verse 22: जब गिदोन ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था, तब गिदोन कहने लगा, “हाय, प्रभु यहोवा! मैं ने तो यहोवा के दूत को साक्षात् देखा है।”
- Verse 23: यहोवा ने उससे कहा, “तुझे शान्ति मिले; मत डर, तू न मरेगा।”
- Verse 24: तब गिदोन ने वहाँ यहोवा की एक वेदी बनाकर उसका नाम ‘यहोवा शालोम’ रखा। वह आज के दिन तक अबीएजेरियों के ओप्रा में बनी है।
- Verse 25: फिर उसी रात को यहोवा ने गिदोन से कहा, “अपने पिता का जवान बैल, अर्थात् दूसरा सात वर्ष का बैल ले, और बाल की जो वेदी तेरे पिता की है उसे गिरा दे, और जो अशेरा देवी उसके पास है उसे काट डाल;
- Verse 26: और उस दृढ़ स्थान की चोटी पर ठहराई हुई रीति से अपने परमेश्वर यहोवा की एक वेदी बना; तब उस दूसरे बैल को ले, और उस अशेरा की लकड़ी, जो तू काट डालेगा, जलाकर होमबलि चढ़ा।”
- Verse 27: तब गिदोन ने अपने संग दस दासों को लेकर यहोवा के वचन के अनुसार किया; परन्तु अपने पिता के घराने और नगर के लोगों के डर के मारे वह काम दिन को न कर सका, इसलिये रात में किया।
- Verse 28: नगर के लोग सबेरे उठकर क्या देखते हैं, कि बाल की वेदी गिरी पड़ी है, और उसके पास की अशेरा कटी पड़ी है, और दूसरा बैल बनाई हुई वेदी पर चढ़ाया हुआ है।
- Verse 29: तब वे आपस में कहने लगे, “यह काम किसने किया?” और पूछपाछ और ढूँढ़–ढाँढ़ करके वे कहने लगे, “यह योआश के पुत्र गिदोन का काम है।”
- Verse 30: तब नगर के मनुष्यों ने योआश से कहा, “अपने पुत्र को बाहर ले आ कि मार डाला जाए, क्योंकि उसने बाल की वेदी को गिरा दिया है, और उसके पास की अशेरा को भी काट डाला है।”
- Verse 31: योआश ने उन सभों से जो उसके सामने खड़े हुए थे कहा, “क्या तुम बाल के लिये वाद–विवाद करोगे? क्या तुम उसे बचाओगे? जो कोई उसके लिये वाद–विवाद करे वह मार डाला जाएगा। सबेरे तक ठहरे रहो; तब तक यदि वह परमेश्वर हो, तो जिस ने उसकी वेदी गिराई है उससे वह आप ही अपना वाद–विवाद करे।”
- Verse 32: इसलिये उस दिन गिदोन का नाम यह कहकर यरूब्बाल रखा गया, कि इसने जो बाल की वेदी गिराई है तो इस पर बाल आप वाद–विवाद कर ले।
- Verse 33: इसके बाद सब मिद्यानी और अमालेकी और पूर्वी इकट्ठे हुए, और पार आकर यिज्रेल की तराई में डेरे डाले।
- Verse 34: तब यहोवा का आत्मा गिदोन में समाया; और उसने नरसिंगा फूँका, तब अबीएजेरी उसकी सुनने के लिये इकट्ठे हुए।
- Verse 35: फिर उसने समस्त मनश्शे के पास अपने दूत भेजे; और वे भी उसके समीप इकट्ठा हुए। और उसने आशेर, जबूलून, और नप्ताली के पास भी दूत भेजे; तब वे भी उससे मिलने को चले आए।
- Verse 36: तब गिदोन ने परमेश्वर से कहा, “यदि तू अपने वचन के अनुसार इस्राएल को मेरे द्वारा छुड़ाएगा,
- Verse 37: तो सुन, मैं एक भेड़ी की ऊन खलिहान में रखूँगा, और यदि ओस केवल उस ऊन पर पड़े, और उसे छोड़ सारी भूमि सूखी रह जाए, तो मैं जान लूँगा कि तू अपने वचन के अनुसार इस्राएल को मेरे द्वारा छुड़ाएगा।”
- Verse 38: और ऐसा ही हुआ। इसलिये जब उसने सबेरे उठकर उस ऊन को दबाकर उसमें से ओस निचोड़ी, तब एक कटोरा भर गया।
- Verse 39: फिर गिदोन ने परमेश्वर से कहा, “यदि मैं एक बार फिर कहूँ, तो तेरा क्रोध मुझ पर न भड़के; मैं इस ऊन से एक बार और भी तेरी परीक्षा करूँ, अर्थात् केवल ऊन ही सूखी रहे, और सारी भूमि पर ओस पड़े।”
- Verse 40: उस रात को परमेश्वर ने ऐसा ही किया; अर्थात् केवल ऊन ही सूखी रह गई, और सारी भूमि पर ओस पड़ी।