पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
यिर्मयाह
अध्याय 51
- Verse 1: यहोवा यों कहता है, मैं बेबीलोन के और लेबकामै के रहनेवालों के विरुद्ध एक नाश करनेवाली वायु चलाऊँगा;
- Verse 2: और मैं बेबीलोन के पास ऐसे लोगों को भेजूँगा जो उसको फटक–फटककर उड़ा देंगे, और इस रीति उसके देश को सुनसान करेंगे; और विपत्ति के दिन चारों ओर से उसके विरुद्ध होंगे।
- Verse 3: धनुर्धारी के विरुद्ध, जो अपना झिलम पहिने हैं, धनुर्धारी धनुष चढ़ाए हुए उठे; उसके जवानों से कुछ कोमलता न करना; उसकी सारी सेना का सत्यानाश करो।
- Verse 4: कसदियों के देश में मरे हुए और उसकी सड़कों में छिदे हुए लोग गिरेंगे।
- Verse 5: क्योंकि, यद्यपि इस्राएल और यहूदा के देश, इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध किए हुए पापों से भरपूर हो गए हैं, तौभी उनके परमेश्वर, सेनाओं के यहोवा ने उनको त्याग नहीं दिया।
- Verse 6: “बेबीलोन में से भागो, अपना अपना प्राण बचाओ! उसके अधर्म में भागी होकर तुम भी न मिट जाओ; क्योंकि यह यहोवा के बदला लेने का समय है, वह उसको बदला देने पर है।
- Verse 7: बेबीलोन यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा था, जिस से सारी पृथ्वी के लोग मतवाले होते थे; जाति जाति के लोगों ने उसके दाखमधु में से पिया, इस कारण वे भी बावले हो गए।
- Verse 8: बेबीलोन अचानक ले ली गई और नष्ट की गई है। उसके लिये हाय–हाय करो! उसके घावों के लिए बलसान औषधि लाओ; सम्भव है वह चंगी हो सके।
- Verse 9: हम बेबीलोन का इलाज करते तो थे, परन्तु वह चंगी नहीं हुई। इसलिये आओ, हम उसको तजकर अपने अपने देश को चले जाएँ; क्योंकि उस पर किए हुए न्याय का निर्णय आकाश वरन् स्वर्ग तक भी पहुँच गया है।
- Verse 10: यहोवा ने हमारे धर्म के काम प्रगट किए हैं; अत: आओ, हम सिय्योन में अपने परमेश्वर यहोवा के काम का वर्णन करें।
- Verse 11: “तीरों को पैना करो! ढालें थामे रहो! क्योंकि यहोवा ने मादी राजाओं के मन को उभारा है, उसने बेबीलोन का नाश करने की कल्पना की है, क्योंकि यहोवा अर्थात् उसके मन्दिर का यही बदला है।
- Verse 12: बेबीलोन की शहरपनाह के विरुद्ध झण्डा खड़ा करो; बहुत पहरुए बैठाओ; घात लगानेवालों को बैठाओ; क्योंकि यहोवा ने बेबीलोन के रहनेवालों के विरुद्ध जो कुछ कहा था, वह अब करने पर है वरन् किया भी है।
- Verse 13: हे बहुत जलाशयों के बीच बसी हुई और बहुत भण्डार रखनेवाली, तेरा अन्त आ गया, तेरे लोभ की सीमा पहुँच गई है।
- Verse 14: सेनाओं के यहोवा ने अपनी ही शपथ खाई है, कि निश्चय मैं तुझ को टिड्डियों के समान अनगिनित मनुष्यों से भर दूँगा, और वे तेरे विरुद्ध ललकारेंगे।
- Verse 15: “उसी ने पृथ्वी को अपने सामर्थ से बनाया, और जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया; और आकाश को अपनी प्रवीणता से तान दिया है।
- Verse 16: जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, वह पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली बनाता, और अपने भण्डार में से पवन निकाल ले आता है।
- Verse 17: सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित हैं; सब सोनारों को अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण लज्जित होना पड़ेगा; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें धोखा देनेवाली हैं, और उनके कुछ भी साँस नहीं चलती।
- Verse 18: वे तो व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य हैं; जब उनके नष्ट किए जाने का समय आएगा, तब वे नष्ट ही होंगी।
- Verse 19: परन्तु जो याकूब का निज भाग है, वह उनके समान नहीं, वह तो सब का बनानेवाला है, और इस्राएल उसका निज भाग है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
- Verse 20: “तू मेरा फरसा और युद्ध के लिये हथियार ठहराया गया है; तेरे द्वारा मैं जाति जाति को तितर–बितर करूँगा; और तेरे ही द्वारा राज्य राज्य को नष्ट करूँगा।
- Verse 21: तेरे ही द्वारा मैं सवार समेत घोड़ों को टुकड़े टुकड़े करूँगा;
- Verse 22: तेरे ही द्वारा रथी समेत रथ को भी टुकड़े टुकड़े करूँगा; तेरे ही द्वारा मैं स्त्री पुरुष दोनों को टुकड़े टुकड़े करूँगा; तेरे ही द्वारा मैं बूढ़े और लड़के दोनों को टुकड़े टुकड़े करूँगा, और जवान पुरुष और जवान स्त्री दोनों को मैं तेरे ही द्वारा टुकड़े टुकड़े करूँगा;
- Verse 23: तेरे ही द्वारा मैं भेड़–बकरियों समेत चरवाहे को टुकड़े–टुकड़े करूँगा; तेरे ही द्वारा मैं किसान और उसके जोड़े बैलों को भी टुकड़े टुकड़े करूँगा; अधिपतियों और हाकिमों को भी मैं तेरे ही द्वारा टुकड़े टुकड़े करूँगा।
- Verse 24: “मैं बेबीलोन को और सारे कसदियों को भी उन सब बुराइयों का बदला दूँगा, जो उन्होंने तुम लोगों के सामने सिय्योन में की है; यहोवा की यही वाणी है।
- Verse 25: “हे नाश करनेवाले पहाड़ जिसके द्वारा सारी पृथ्वी नाश हुई है, यहोवा की यह वाणी है कि मैं तेरे विरुद्ध हूँ और हाथ बढ़ाकर तुझे ढाँगों पर से लुढ़का दूँगा और जला हुआ पहाड़ बनाऊँगा।
- Verse 26: लोग तुझ से न तो घर के कोने के लिये पत्थर लेंगे, और न नींव के लिये, क्योंकि तू सदा उजाड़ रहेगा, यहोवा की यही वाणी है।
- Verse 27: “देश में झण्डा खड़ा करो, जाति जाति में नरसिंगा फूँको; उसके विरुद्ध जाति जाति को तैयार करो; अरारात, मिन्नी और अश्कनज नामक राज्यों को उसके विरुद्ध बुलाओ, उसके विरुद्ध सेनापति भी ठहराओ; घोड़ों को शिखरवाली टिड्डियों के समान अनगिनित चढ़ा ले आओ।
- Verse 28: उसके विरुद्ध जातियों को तैयार करो; मादी राजाओं को उनके अधिपतियों, सब हाकिमों सहित और उस राज्य के सारे अधिपतियों सहित और उस राज्य के सारे देश को तैयार करो।
- Verse 29: यहोवा ने विचारा है कि वह बेबीलोन के देश को ऐसा उजाड़ करे कि उस में कोई भी न रहे; इसलिये पृथ्वी काँपती है और दु:खित होती है।
- Verse 30: बेबीलोन के शूरवीर गढ़ों में रहकर लड़ने से इन्कार करते हैं, उनकी वीरता जाती रही है; और यह देखकर कि उनके वासस्थानों में आग लग गई है वे स्त्री बन गए हैं; उसके फाटकों के बेण्डे तोड़े गए हैं।
- Verse 31: एक हरकारा दूसरे हरकारे से और एक समाचार देनेवाला दूसरे समाचार देनेवाले से मिलने और बेबीलोन के राजा को यह समाचार देने के लिये दौड़ेगा कि तेरा नगर चारों ओर से ले लिया गया है;
- Verse 32: और घाट शत्रुओं के वश में हो गए हैं, ताल भी सुखाये गए, और योद्धा घबरा उठे हैं।
- Verse 33: क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है : बेबीलोन की बेटी दाँवते समय के खलिहान के समान है, थोड़े ही दिनों में उसकी कटनी का समय आएगा।”
- Verse 34: “बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझ को खा लिया, मुझ को पीस डाला; उसने मुझे छूछे बर्तन के समान कर दिया, उसने मगरमच्छ के समान मुझ को निगल लिया है; और मुझ को स्वादिष्ट भोजन जानकर अपना पेट मुझ से भर लिया है, उस ने मुझ को जबरन निकाल दिया है,”
- Verse 35: सिय्योन की रहनेवाली कहेगी, “जो उपद्रव मुझ पर और मेरे शरीर पर हुआ है, वह बेबीलोन पर पलट जाए।” और यरूशलेम कहेगी, “मुझ में की हुई हत्याओं का दोष कसदियों के देश के रहनेवालों पर लगे।”
- Verse 36: इसलिये यहोवा कहता है, “मैं तेरा मुक़द्दमा लड़ूँगा और तेरा बदला लूँगा। मैं उसके ताल को और उसके सोतों को सुखा दूँगा;
- Verse 37: और बेबीलोन खण्डहर, और गीदड़ों का वासस्थान होगा; और लोग उसे देखकर चकित होंगे और ताली बजाएँगे, और उसमें कोई न रहेगा।
- Verse 38: “लोग एक संग ऐसे गरजेंगे और गुर्राएँगे, जैसे युवा सिंह व सिंह के बच्चे अहेर पर करते हैं।
- Verse 39: परन्तु जब जब वे उत्तेजित हों, तब मैं भोज तैयार करके उन्हें ऐसा मतवाला करूँगा, कि वे हुलसकर सदा की नींद में पड़ेंगे और कभी न जागेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
- Verse 40: मैं उनको, भेड़ों के बच्चों, और मेढ़ों और बकरों के समान घात करा दूँगा।
- Verse 41: “शेशक, जिसकी प्रशंसा सारी पृथ्वी पर होती थी, कैसे ले लिया गया? वह कैसे पकड़ा गया? बेबीलोन जातियों के बीच कैसे सुनसान हो गया है?
- Verse 42: बेबीलोन के ऊपर समुद्र चढ़ आया है, वह उसकी बहुत सी लहरों में डूब गया है।
- Verse 43: उसके नगर उजड़ गए, उसका देश निर्जन और निर्जल हो गया है, उस में कोई मनुष्य नहीं रहता, और उससे होकर कोई आदमी नहीं चलता।
- Verse 44: मैं बेबीलोन में बेल को दण्ड दूँगा, और उसने जो कुछ निगल लिया है, वह उसके मुँह से उगलवाऊँगा। जातियों के लोग फिर उसकी ओर ताँता बाँधे हुए न चलेंगे; बेबीलोन की शहरपनाह गिराई जाएगी।
- Verse 45: हे मेरी प्रजा, उसमें से निकल आओ! अपने अपने प्राण को यहोवा के भड़के हुए कोप से बचाओ!
- Verse 46: जब उड़ती हुई बात उस देश में सुनी जाए, तब तुम्हारा मन न घबराए; और जो उड़ती हुई चर्चा पृथ्वी पर सुनी जाएगी तुम उससे न डरना: उसके एक वर्ष बाद एक और बात उड़ती हुई आएगी, तब उसके बाद दूसरे वर्ष में एक और बात उड़ती हुई आएगी, और उस देश में उपद्रव होगा, और एक हाकिम दूसरे के विरुद्ध होगा।
- Verse 47: “इसलिये देख, वे दिन आते हैं जब मैं बेबीलोन की खुदी हुई मूरतों पर दण्ड की आज्ञा करूँगा; उस सारे देश के लोगों का मुँह काला हो जाएगा, और उसके सब मारे हुए लोग उसी में पड़े रहेंगे।
- Verse 48: तब स्वर्ग और पृथ्वी के सारे निवासी बेबीलोन पर जयजयकार करेंगे; क्योंकि उत्तर दिशा से नाश करनेवाले उस पर चढ़ाई करेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
- Verse 49: जैसे बेबीलोन ने इस्राएल के लोगों को मारा, वैसे ही सारे देश के लोग उसी में मार डाले जाएँगे।
- Verse 50: “हे तलवार से बचे हुओ, भागो, खड़े मत रहो! यहोवा को दूर से स्मरण करो, और यरूशलेम की भी सुधि लो :
- Verse 51: ‘हम व्याकुल हैं, क्योंकि हम ने अपनी नामधराई सुनी है; यहोवा के पवित्र भवन में विधर्मी घुस आए हैं, इस कारण हम लज्जित हैं।’
- Verse 52: “इसलिये देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आनेवाले हैं कि मैं उसकी खुदी हुई मूरतों पर दण्ड भेजूँगा, और उसके सारे देश में लोग घायल होकर कराहते रहेंगे।
- Verse 53: चाहे बेबीलोन ऐसा ऊँचा बन जाए कि आकाश से बातें करे और उसके ऊँचे गढ़ और भी दृढ़ किए जाएँ, तौभी मैं उसे नष्ट करने के लिये, लोगों को भेजूँगा, यहोवा की यह वाणी है।
- Verse 54: “बेबीलोन से चिल्लाहट का शब्द सुनाई पड़ता है! कसदियों के देश से सत्यानाश का बड़ा कोलाहल सुनाई देता है।
- Verse 55: क्योंकि यहोवा बेबीलोन का नाश कर रहा है और उसके बड़े कोलाहल को बन्द कर रहा है। इस से उनका कोलाहल महासागर का सा सुनाई देता है।
- Verse 56: बेबीलोन पर भी नाश करनेवाले चढ़ आए हैं, और उसके शूरवीर पकड़े गए हैं और उनके धनुष तोड़ डाले गए; क्योंकि यहोवा बदला देनेवाला परमेश्वर है, वह अवश्य ही बदला लेगा।
- Verse 57: मैं उसके हाकिमों, पण्डितों, अधिपतियों, रईसों, और शूरवीरों को ऐसा मतवाला करूँगा कि वे सदा की नींद में पड़ेंगे और फिर न जागेंगे, सेनाओं का यहोवा, जिसका नाम राजाधिराज है, उसकी यही वाणी है।
- Verse 58: “सेनाओं का यहोवा यों भी कहता है, बेबीलोन की चौड़ी शहरपनाह नेव से ढाई जाएगी, और उसके ऊँचे फाटक आग लगाकर जलाए जाएँगे। उस में राज्य राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ठहरेगा, और जातियों का परिश्रम आग का कौर हो जाएगा और वे थक जाएँगे।”
- Verse 59: यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के चौथे वर्ष में जब उसके साथ सरायाह भी बेबीलोन को गया था, जो नेरिय्याह का पुत्र महसेयाह का पोता और राजभवन का अधिकारी भी था,
- Verse 60: तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने उसको ये बातें बताईं अर्थात् वे सब बातें जो बेबीलोन पर पड़नेवाली विपत्ति के विषय लिखी हुई हैं, उन्हें यिर्मयाह ने पुस्तक में लिख दिया।
- Verse 61: यिर्मयाह ने सरायाह से कहा, “जब तू बेबीलोन में पहुँचे, तब अवश्य ही ये सब वचन पढ़ना,
- Verse 62: और यह कहना, ‘हे यहोवा तू ने तो इस स्थान के विषय में यह कहा है कि मैं इसे ऐसा मिटा दूँगा कि इस में क्या मनुष्य, क्या पशु, कोई भी न रहेगा, वरन् यह सदा उजाड़ पड़ा रहेगा।’
- Verse 63: जब तू इस पुस्तक को पढ़ चुके, तब इसे एक पत्थर के संग बाँधकर फरात महानद के बीच में फेंक देना,
- Verse 64: और यह कहना, ‘यों ही बेबीलोन डूब जाएगा और मैं उस पर ऐसी विपत्ति डालूँगा कि वह फिर कभी न उठेगा। यों उसका सारा परिश्रम व्यर्थ ही ठहरेगा और वे थके रहेंगे।’ ” यहाँ तक यिर्मयाह के वचन हैं।